Bengal Re-poll : किसने उठाई बंगाल चुनाव में 77 बूथों पर दोबारा मतदान की मांग, आयोग के फैसले पर टिकी नजर

पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने 77 बूथों पर दोबारा मतदान की मांग की है। EVM गड़बड़ी और झड़प के आरोप लगे हैं। चुनाव आयोग जल्द इस पर फैसला ले सकता है।

Bengal election 77 booths re poll demand EVM issue

Bengal Re-poll Demand:पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच सियासी माहौल और गरम हो गया है। Bharatiya Janata Party ने दूसरे चरण की वोटिंग के बाद 77 बूथों पर दोबारा मतदान कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि 29 अप्रैल को हुई वोटिंग के दौरान इन बूथों पर गड़बड़ी और झड़प की घटनाएं सामने आईं।

चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार

सूत्रों के अनुसार, Election Commission of India इस मामले पर जल्द फैसला ले सकता है। बताया जा रहा है कि गुरुवार को आयोग इस मांग पर अपना निर्णय सुना सकता है। फिलहाल सभी की नजर इसी फैसले पर टिकी हुई है।

किन इलाकों में है मामला

जानकारी के मुताबिक, जिन 77 मतदान केंद्रों पर दोबारा वोटिंग की मांग की गई है, उनमें से 64 डायमंड हार्बर क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। यह इलाका Abhishek Banerjee का संसदीय क्षेत्र है। बाकी बूथ फाल्टा, बज-बज और मगराहाट (पूर्व) विधानसभा क्षेत्रों में आते हैं, जो दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित हैं।

EVM गड़बड़ी का आरोप

भाजपा ने आरोप लगाया है कि फाल्टा क्षेत्र के कई बूथों पर ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ की गई। पार्टी का कहना है कि कुछ मशीनों में पार्टी के चुनाव चिन्ह के सामने वाले बटन को टेप से ढक दिया गया था, जिससे मतदाता अपने पसंद का उम्मीदवार नहीं चुन पा रहे थे। इस मामले को लेकर चुनाव आयोग में आधिकारिक शिकायत भी दर्ज कराई गई है।

पहले से विवादों में रहा इलाका

फाल्टा विधानसभा क्षेत्र पहले से ही विवादों में रहा है। यहां चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा और तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान के बीच तीखी बहस भी हुई थी। इसके बाद ईवीएम पर टेप लगाने के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया।

चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट

मामले को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने तुरंत संज्ञान लिया और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय से रिपोर्ट मांगी। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, यह रिपोर्ट आयोग को भेज दी गई है और अब जल्द ही अंतिम फैसला आने की उम्मीद है।

पहले चरण में नहीं हुई समस्या

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को हुआ था। उस दौरान भी कुछ छोटी-मोटी घटनाएं हुई थीं, लेकिन किसी भी बूथ पर दोबारा मतदान की जरूरत नहीं पड़ी थी। इस बार दूसरे चरण में उठे विवाद ने चुनावी माहौल को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया है।

Exit mobile version