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Reliance का नया मास्टरप्लान, खेती से डिफेंस तक कौन कौन से बड़े कारोबारों में उतरेगी कंपनी

Reliance new business plan: मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड अब अपने पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़ते हुए कई नए रणनीतिक क्षेत्रों में कदम रखने जा रही है। कंपनी को अमोनिया, फर्टिलाइजर, एग्रो-केमिकल्स और डिफेंस एक्सप्लोसिव जैसे कारोबार में प्रवेश की मंजूरी मिल गई है। रिलायंस के शेयरधारकों ने कंपनी के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन यानी MOA में बदलाव के प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूरी दी है। इससे कंपनी के भविष्य के कारोबार का दायरा काफी बड़ा हो जाएगा।

MOA में बड़ा बदलाव

रिलायंस ने एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए बताया कि 20 अगस्त 2026 को समाप्त हुई ई-वोटिंग प्रक्रिया में कंपनी के ऑब्जेक्ट्स क्लॉज में बदलाव के विशेष प्रस्ताव को 99.99 प्रतिशत से अधिक वोट मिले। इस बदलाव के तहत MOA में नया सब-क्लॉज 14 जोड़ा जाएगा। इसके बाद कंपनी को नए क्षेत्रों में उत्पादन, निर्माण, व्यापार और अन्य संबंधित गतिविधियां करने की अनुमति मिलेगी। यानी रिलायंस अब इन सेक्टर्स में अपने कारोबार को औपचारिक रूप से विस्तार दे सकेगी।

अमोनिया कारोबार की तैयारी

नए प्रावधान के तहत रिलायंस विभिन्न ग्रेड के अमोनिया, नाइट्रिक एसिड और संबंधित रसायनों का निर्माण कर सकेगी। कंपनी इन उत्पादों से जुड़े कारोबार, प्रोसेसिंग और वितरण गतिविधियों में भी उतर सकती है। यह कदम रिलायंस के केमिकल और मैन्युफैक्चरिंग कारोबार को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कंपनी का मौजूदा औद्योगिक अनुभव नए केमिकल सेगमेंट में विस्तार के लिए आधार बन सकता है।

फर्टिलाइजर पर फोकस

रिलायंस का नया प्लान सिर्फ केमिकल सेक्टर तक सीमित नहीं है। कंपनी नाइट्रोजन और फास्फोरस आधारित फर्टिलाइजर के साथ-साथ एग्रो-केमिकल्स के उत्पादन, निर्माण और व्यापार में भी प्रवेश कर सकेगी। इससे कंपनी की पहुंच सीधे कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक बढ़ सकती है। फर्टिलाइजर और कृषि रसायनों की बड़ी घरेलू मांग को देखते हुए यह रिलायंस के लिए एक महत्वपूर्ण नया बिजनेस वर्टिकल बन सकता है।

डिफेंस में बढ़ेगी ताकत

डिफेंस एक्सप्लोसिव कारोबार में संभावित एंट्री रिलायंस की विस्तार रणनीति का सबसे रणनीतिक हिस्सा मानी जा रही है। कंपनी नागरिक, औद्योगिक और रक्षा क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटक तथा ब्लास्टिंग एजेंट्स से जुड़े कारोबार में काम कर सकेगी। इससे भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता अभियान में रिलायंस की भूमिका बढ़ सकती है। हालांकि इस क्षेत्र में कारोबार के लिए लागू नियमों और आवश्यक मंजूरियों का पालन करना होगा।

भारत से विदेश तक कारोबार

कंपनी ने संकेत दिया है कि इन नए क्षेत्रों में उसकी गतिविधियां सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेंगी। रिलायंस उत्पादन, रिफाइनिंग, भंडारण और वितरण से जुड़ी गतिविधियां भारत के साथ-साथ विदेशों में भी कर सकती है। इसके अलावा शेयरधारकों ने कंपनी और उसकी सहायक कंपनियों से जुड़े दो अन्य मटेरियल रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन प्रस्तावों को भी आवश्यक बहुमत से मंजूरी दी है। इस तरह रिलायंस का नया प्लान खेती, केमिकल और डिफेंस तीनों रणनीतिक क्षेत्रों में कंपनी की मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और किसी भी तरह की निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श करें।

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