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Market Crash : सेंसेक्स 1100 अंक गिरा, निफ्टी 350 अंक टूटा; विदेशी निवेशक निकल भागे, तेल भी महंगा

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1100 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में करीब 350 अंकों की गिरावट आई। बाजार में इस तेज गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण बताए जा रहे हैं।

अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ती ब्याज दर, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ा।

सुबह से दबाव में बाजार

गुरुवार को कारोबार शुरू होते ही शेयर बाजार में कमजोरी नजर आई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बिकवाली बढ़ती गई। निवेशकों ने कई बड़े शेयरों में मुनाफावसूली और बिकवाली की, जिससे बाजार का दबाव और बढ़ गया।

बाजार में गिरावट केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही। कई प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। इससे दोनों प्रमुख सूचकांकों की गिरावट गहरी होती चली गई।

अमेरिकी बॉन्ड से बढ़ी चिंता

अमेरिकी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज बढ़ना भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। जब अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो विदेशी निवेशकों के लिए वहां पैसा लगाना ज्यादा आकर्षक हो सकता है।

ऐसे माहौल में निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी परिसंपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं। भारत में विदेशी निवेशकों की बिकवाली पहले से ही बाजार पर दबाव बना रही है।

यही वजह है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी को भारतीय शेयर बाजार की गिरावट से जोड़कर देखा जा रहा है।

विदेशी निवेशक बेच रहे शेयर

भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। विदेशी निवेशक जब बड़ी मात्रा में भारतीय शेयर बेचते हैं तो बाजार में उपलब्ध बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है।

इसका असर खासकर बड़े और प्रमुख शेयरों पर दिखाई देता है। विदेशी निवेशकों की निकासी के बीच घरेलू निवेशकों की खरीदारी बाजार को पूरी तरह संभाल नहीं पाई।

महंगा कच्चा तेल भी वजह

कच्चे तेल की बढ़ती कीमत ने भी भारतीय बाजार की चिंता बढ़ाई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत और महंगाई पर भी दबाव पड़ने की आशंका रहती है।

निवेशकों को डर है कि लंबे समय तक तेल महंगा रहने से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

आगे बाजार की नजर

अब निवेशकों की नजर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेगी।

इन कारकों में बदलाव के आधार पर बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। गुरुवार की गिरावट ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक घटनाओं का सीधा असर पड़ता है।

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