कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे? मिलावट के खिलाफ सख्त कार्रवाई से फिर चर्चा में आए महाराष्ट्र के ‘सिंघम’ अधिकारी

महाराष्ट्र FDA कमिश्नर IAS तुकाराम मुंढे अपनी सख्त कार्यशैली और मिलावट के खिलाफ अभियान के कारण चर्चा में हैं। जानिए उनका प्रशासनिक सफर, प्रमुख पद, लगातार तबादले और 'सुरक्षित भोजन, सुरक्षित महाराष्ट्र' अभियान की पूरी कहानी।

IAS Tukaram Mundhe: महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे अपनी ईमानदार छवि और सख्त प्रशासनिक फैसलों के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं। लोग उन्हें अक्सर ‘महाराष्ट्र का सिंघम’ भी कहते हैं। इन दिनों वह फिर चर्चा में हैं क्योंकि उन्होंने बाजार में असली पनीर के नाम पर बेचे जा रहे एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। महाराष्ट्र FDA और FSSAI की संयुक्त जांच के दौरान कई कंपनियों पर नियमों के उल्लंघन को लेकर सख्ती दिखाई गई। यही वजह है कि उनकी कार्यशैली की देशभर में चर्चा हो रही है। अपने करीब 21 साल के प्रशासनिक करियर में वे 25 से ज्यादा बार तबादले का सामना कर चुके हैं, लेकिन हर जगह नियमों के अनुसार काम करने की पहचान बनाए रखी।

ईमानदारी से भरा प्रशासनिक सफर

UPSC परीक्षा पास करने के बाद वर्ष 2005 में तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र कैडर के IAS अधिकारी बने। शुरुआती नियुक्ति सोलापुर जिला परिषद के CEO के रूप में हुई, जहां उन्होंने ग्रामीण स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था में कई सुधार किए। इसके बाद देगलूर में उपविभागीय अधिकारी रहते हुए अवैध रेत खनन और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया। नागपुर जिला परिषद में उन्होंने अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों और शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की। जनजातीय विकास विभाग में रहते हुए आदिवासी योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए कई नियम लागू किए। उनकी प्राथमिकता हमेशा पारदर्शिता और अनुशासन रही।

हर जिम्मेदारी पर दिखी सख्ती

सोलापुर के जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने जल संरक्षण अभियान को मजबूती दी और रेत माफिया पर कार्रवाई की। नवी मुंबई नगर निगम के कमिश्नर बनने के बाद अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाया और ‘वॉक विद कमिश्नर’ जैसी पहल शुरू की। राजनीतिक दबाव के बावजूद उन्होंने अपने फैसले नहीं बदले। बाद में PMPML में रहते हुए बस सेवाओं की समयबद्धता सुधारी और बिना टिकट यात्रा करने वालों पर सख्ती की। नासिक नगर निगम में उन्होंने टैक्स व्यवस्था बेहतर बनाई और अवैध होर्डिंग्स हटाने का अभियान चलाया। कोविड-19 के दौरान नागपुर नगर निगम कमिश्नर के रूप में उन्होंने लॉकडाउन और स्वास्थ्य नियमों को सख्ती से लागू कराया।

स्वास्थ्य, किसानों और मजदूरों के लिए भी किया काम

साल 2021 से 2022 के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में मिशन निदेशक और स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक के रूप में उन्होंने ग्रामीण इलाकों तक दवाइयों और डॉक्टरों की उपलब्धता पर खास ध्यान दिया। इसके बाद कृषि और पशुपालन विभाग में सचिव रहते हुए किसानों से जुड़ी योजनाओं को पारदर्शी तरीके से लागू कराने की दिशा में काम किया। वर्ष 2024 में असंगठित कामगार विकास आयुक्त के रूप में भी उन्होंने कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। हर पद पर उनकी पहचान नियमों का पालन कराने वाले अधिकारी की रही।

‘सुरक्षित भोजन, सुरक्षित महाराष्ट्र’ अभियान

वर्तमान में तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर हैं। उन्होंने ‘सुरक्षित भोजन, सुरक्षित महाराष्ट्र’ अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित उत्पाद उपलब्ध कराना है। इस अभियान के तहत कई कंपनियों की जांच की गई और गलत दावों पर कार्रवाई हुई। हाल ही में शहद, घी, नारियल पानी जैसे उत्पादों पर ‘100 प्रतिशत शुद्ध’ और ‘ऑर्गेनिक’ जैसे दावों की जांच की गई। वहीं ओल्ड मॉन्क, मैकडॉवेल्स जैसे प्रसिद्ध ब्रांड्स के उत्पादों पर भी नियमों के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई की गई। उनकी सख्त कार्यशैली के कारण आज उन्हें देश के सबसे चर्चित और ईमानदार IAS अधिकारियों में गिना जाता है।

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