Monsoon Forecast : मौसम विभाग की डरावनी चेतावनी, क्या इस साल सामान्य से कम होगी बारिश, खेती पर पड़ सकता है असर

मौसम विभाग ने 2026 में कमजोर मॉनसून की आशंका जताई है। कम बारिश से खेती, पानी और महंगाई पर असर पड़ सकता है। कुछ इलाकों में अच्छी बारिश की भी उम्मीद जताई गई है।

Weak Rainfall Forecast: भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने साल 2026 के मॉनसून को लेकर लंबी अवधि का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके मुताबिक इस बार देश में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। जून से सितंबर के बीच होने वाली कुल बारिश औसत से करीब 92 प्रतिशत रह सकती है। यह आंकड़ा 1971 से 2020 तक के औसत 87 सेंटीमीटर के आधार पर बताया गया है। यानी इस बार बारिश थोड़ी कम रहने की संभावना है।

अल नीनो का असर बढ़ेगा

मौसम विभाग का कहना है कि इस साल अल नीनो का प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसकी वजह से गर्मी ज्यादा पड़ सकती है और बारिश कम हो सकती है। अप्रैल से जून तक स्थिति सामान्य रहने की उम्मीद है, लेकिन उसके बाद मॉनसून के दौरान अल नीनो मजबूत हो सकता है। यही वजह है कि मॉनसून कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं।

कहां हो सकती है ज्यादा बारिश

हालांकि देश के कुछ हिस्सों में राहत की खबर भी है। मौसम विभाग ने बताया है कि पूर्वोत्तर भारत, उत्तर-पश्चिम के कुछ इलाके और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है। वहीं हिंद महासागर में फिलहाल सामान्य स्थिति बनी हुई है, जिससे मॉनसून समय पर आने की उम्मीद है।

कई इलाकों में सूखे के संकेत

दूसरी तरफ, कई क्षेत्रों में कम बारिश या सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। खासकर उत्तर भारत के गंगा के मैदानी इलाकों और आसपास के पठारी क्षेत्रों में बारिश कम रहने की संभावना है। इसके अलावा मध्य भारत और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में भी कम बारिश के संकेत दिए गए हैं।

खेती पर पड़ेगा असर

कम बारिश का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ सकता है। अगर समय पर और पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो बुवाई और फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ सकती है और खेती की लागत भी बढ़ सकती है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

कमजोर मॉनसून का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। सब्जियां, दाल और अन्य जरूरी चीजें महंगी हो सकती हैं। कम बारिश की वजह से फसल कम होगी, जिससे बाजार में सप्लाई घट सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर खेती कमजोर रहती है, तो गांवों में आय भी कम हो जाएगी। इससे ग्रामीण इलाकों में खर्च कम होगा और इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासतौर पर ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों की बिक्री भी प्रभावित हो सकती है।

कुल मिलाकर क्या संकेत हैं

कुल मिलाकर इस साल का मॉनसून थोड़ा कमजोर रहने की आशंका है। हालांकि कुछ इलाकों में अच्छी बारिश राहत दे सकती है, लेकिन देश के बड़े हिस्से को कम बारिश का सामना करना पड़ सकता है।

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