दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को BRICS का बड़ा सम्मेलन होने जा रहा है। भारत इस साल संगठन की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में इसकी मेजबानी करेगा। इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजर है, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह सम्मेलन खास महत्व रखता है। रूस, चीन और ईरान जैसे देशों की मौजूदगी और BRICS के बढ़ते दायरे ने वॉशिंगटन की चिंता बढ़ाई है।
अमेरिका की चिंता
BRICS अब केवल ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका तक सीमित नहीं है। ईरान समेत कई नए देश इसके साथ जुड़े हैं, जिससे संगठन का आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव बढ़ा है। BRICS के कुछ सदस्य अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को मजबूत करने की बात करते रहे हैं। हालांकि, भारत BRICS को एंटी-अमेरिका या एंटी-वेस्ट गठजोड़ के बजाय ग्लोबल साउथ की आवाज और व्यावहारिक आर्थिक सहयोग का मंच मानता है।
ट्रंप की टैरिफ धमकी
डोनाल्ड ट्रंप कई बार BRICS को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। नवंबर 2024 में उन्होंने डॉलर को हटाने की कोशिश करने वाले BRICS देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। जनवरी और फरवरी 2025 में भी उन्होंने ऐसी ही धमकी दोहराई। जुलाई 2025 में ट्रंप ने कथित एंटी-अमेरिकन नीतियों से जुड़ने वाले देशों पर अतिरिक्त 10 फीसदी टैरिफ की बात कही। इससे साफ है कि उनके लिए BRICS सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि अमेरिकी आर्थिक ताकत और डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व का भी मुद्दा है।
डॉलर पर असर
हालांकि, BRICS के पास अभी कोई साझा मुद्रा नहीं है और भारत ने भी डॉलर को हटाने वाली साझा करेंसी का समर्थन नहीं किया है। भारत का जोर राष्ट्रीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार और बेहतर डिजिटल पेमेंट कनेक्टिविटी जैसे व्यावहारिक विकल्पों पर है। रूस की तरफ से भी कहा गया है कि उसका लक्ष्य सीधे तौर पर डी-डॉलराइजेशन नहीं, बल्कि अलग-अलग स्वीकार्य भुगतान माध्यमों के विकल्प खुले रखना है। इसलिए फिलहाल BRICS डॉलर को खत्म करने की स्थिति में नहीं है।
ईरान से चुनौती
दिल्ली सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे ईरान का BRICS में शामिल होना संगठन के बदलते भू-राजनीतिक स्वरूप को दिखाता है। भारत के सामने चुनौती रूस, चीन और ईरान जैसे देशों के साथ BRICS में सहयोग बढ़ाते हुए अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों का संतुलन बनाए रखने की होगी।
BRICS बैंक की ताकत
BRICS की ताकत केवल बैठकों तक सीमित नहीं है। न्यू डेवलपमेंट बैंक यानी BRICS बैंक विकासशील देशों के लिए वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहा है। मार्च 2026 तक NDB ने भारत में 32 परियोजनाओं के लिए करीब 9.5 अरब डॉलर की मंजूरी दी है। इसमें मेट्रो और RRTS, सड़क-पुल, जल-सफाई, स्वच्छ ऊर्जा और स्वास्थ्य जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ RRTS के लिए 500 मिलियन डॉलर और असम के दो पुल प्रोजेक्ट्स के लिए 633.8 मिलियन डॉलर की फंडिंग इसके उदाहरण हैं।
