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BSP family dispute : कैसे समधी से दुश्मनी तक पहुंचा बसपा मुखिया का रिश्ता, आकाश और अशोक सिद्धार्थ दोनों पार्टी से बाहर

BSP Akash Anand Ashok Siddharth

BSP Politics:सियासत में न कोई रिश्ता हमेशा अपना रहता है और न कोई दुश्मनी स्थायी होती है। बसपा में चल रही अंदरूनी खींचतान इस बात का बड़ा उदाहरण है। करीब साढ़े तीन साल पहले तक जो रिश्ता परिवार और राजनीति को जोड़ रहा था, वही अब पार्टी से दूरी की वजह बन गया है।

मायावती के भतीजे आकाश आनंद की शादी 26 मार्च 2023 को गुरुग्राम, हरियाणा में डॉक्टर प्रज्ञा से हुई थी। प्रज्ञा बसपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ की बेटी हैं। शादी बौद्ध परंपरा के अनुसार हुई थी। इस शादी के बाद मायावती और अशोक सिद्धार्थ का रिश्ता राजनीतिक रिश्तेदारी में बदल गया और दोनों समधी बन गए।

लेकिन समय के साथ यही रिश्तेदारी विवाद का कारण बन गई। आकाश आनंद को कई बार पार्टी से हटाया गया और फिर वापस लाया गया। उन पर आरोप लगते रहे कि वह अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में काम कर रहे हैं।

वफादार से बगावती तक

अशोक सिद्धार्थ का बसपा से जुड़ाव काफी पुराना रहा है। उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज से पैरामेडिकल ऑप्थैल्मिक असिस्टेंट का डिप्लोमा किया था। बाद में यूपी के स्वास्थ्य विभाग में नौकरी की।

कन्नौज में तैनाती के दौरान उनका झुकाव दलित आंदोलन की तरफ हुआ और वह बामसेफ से जुड़े। यही संगठन बसपा संस्थापक कांशीराम की राजनीतिक गतिविधियों का अहम आधार रहा था। इसी दौर में अशोक सिद्धार्थ की नजदीकी मायावती से बढ़ी।

मायावती की सलाह पर उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और बसपा की राजनीति में सक्रिय हो गए। इसके बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। 2009 में मायावती ने उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद भेजा। वह 2015 तक एमएलसी रहे। 2016 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया, जहां उन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। संगठन में भी उन्हें पश्चिमी यूपी समेत कई राज्यों की जिम्मेदारी मिली।

सियासी दोस्ती बनी रिश्तेदारी

आकाश आनंद की शादी के बाद मायावती और अशोक सिद्धार्थ का राजनीतिक रिश्ता पारिवारिक रिश्ते में बदल गया। लेकिन यही रिश्ता आगे चलकर दोनों के बीच दूरी की वजह बन गया।

अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से दो बार बाहर किया जा चुका है। बताया जाता है कि परिवार में विवाद कम करने के लिए उन्होंने मायावती के कहने पर सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा भी की, लेकिन इसके बावजूद पार्टी में उनकी वापसी नहीं हुई।

अब उनके दामाद आकाश आनंद भी बसपा से बाहर हैं। ऐसे में कभी समधी रहे मायावती और अशोक सिद्धार्थ के रिश्ते का सियासी सफर दोस्ती से दूरी और फिर विरोध तक पहुंच गया है।

आकाश पर कार्रवाई का सिलसिला

आकाश आनंद को पहली बार 7 मई 2024 को बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर और मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी की जिम्मेदारी से हटाया गया। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सीतापुर और उन्नाव में दिए गए उनके भाषणों को इसकी वजह माना गया।

23 जून 2024 को उन्हें फिर इन जिम्मेदारियों पर बहाल कर दिया गया। इसके बाद 2 मार्च 2025 को उन्हें दोबारा पदों से हटाया गया और 3 मार्च को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। मायावती ने आरोप लगाया कि आकाश अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आकर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं।

मई 2025 में आकाश के सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के बाद उनकी बसपा में वापसी हुई। उन्हें चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर और बाद में नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई।

फिर टूटा राजनीतिक रिश्ता

3 सितंबर 2026 को मायावती ने आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से यह कहते हुए हटा दिया कि वह अभी इस जिम्मेदारी के लिए अपरिपक्व हैं। इसके ठीक एक सप्ताह बाद 10 सितंबर को उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।

मायावती की ओर से यह भी कहा गया कि आकाश पार्टी से ज्यादा अपने परिवार और खास तौर पर ससुर अशोक सिद्धार्थ को तरजीह दे रहे थे और वह ‘डबल माइंड’ होकर काम कर रहे थे।

फिलहाल आकाश आनंद के पास बसपा में कोई पद या जिम्मेदारी नहीं है। वहीं उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ भी पार्टी से बाहर हैं। ऐसे में जिस रिश्ते की शुरुआत मायावती के परिवार और उनके करीबी नेता के बीच समधी के रूप में हुई थी, वह अब बसपा की राजनीति में सबसे बड़े पारिवारिक विवादों में बदल चुका है।

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