Reservation Debate:आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण को लेकर दिए ताजा बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद इस मुद्दे पर खुलकर सामने आए हैं। मायावती ने एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर की चर्चा को संवैधानिक उद्देश्य के खिलाफ बताया, जबकि चंद्रशेखर ने आरक्षण और मंडल आयोग की सिफारिशों को लेकर बीजेपी और आरएसएस पर सवाल उठाए। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों नेताओं की सक्रियता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मायावती ने साधा निशाना
मायावती ने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के लिए आरक्षण केवल आर्थिक लाभ का विषय नहीं है, बल्कि सामाजिक बराबरी और सम्मान से जुड़ा अधिकार है। उनका कहना है कि एससी और एसटी समुदायों के खिलाफ जातिगत भेदभाव, शोषण और अत्याचार पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। ऐसे में क्रीमी लेयर को लेकर बहस आरक्षण के मूल उद्देश्य को प्रभावित कर सकती है। मायावती ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह अदालत के सामने एससी-एसटी समुदायों के हितों का मजबूती से पक्ष रखे और आरक्षण से जुड़े संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करे।
चंद्रशेखर ने उठाए सवाल
चंद्रशेखर आजाद ने भी भागवत के बयान को लेकर बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि जब 1990 में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू हुईं, तब दूसरी ओर कमंडल की राजनीति को बढ़ावा दिया गया। चंद्रशेखर ने कहा कि जब भी लोगों ने अपने अधिकारों की मांग उठाई, तब उनके सामने धर्म का मुद्दा खड़ा किया गया। उन्होंने सरकार से मंडल आयोग की सभी सिफारिशों को लागू करने की मांग की और कहा कि ऐसा नहीं होने पर सत्ता छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे पर अखिलेश यादव और 2017 की एक घटना का भी जिक्र किया।
2015 की याद क्यों आई
भागवत के बयान के बाद यूपी की राजनीति में 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव की चर्चा भी शुरू हो गई है। उस चुनाव से पहले भागवत ने आरक्षण की समीक्षा की बात कही थी। इसके बाद लालू प्रसाद यादव ने इसे चुनावी मुद्दा बनाते हुए लगातार आरोप लगाया था कि बीजेपी और आरएसएस आरक्षण खत्म करना चाहते हैं। विपक्ष ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया और बिहार चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को बड़ा झटका लगा। अब यूपी में भी सवाल उठ रहा है कि क्या मायावती और चंद्रशेखर इस मुद्दे को 2027 के विधानसभा चुनाव तक बड़े राजनीतिक हथियार में बदल सकते हैं।
भागवत ने क्या कहा
मोहन भागवत ने Gen-Z छात्रों के साथ बातचीत के दौरान कहा कि आरक्षण को राजनीतिक मुद्दा बना दिए जाने से समाज में कड़वाहट पैदा हुई। उन्होंने कहा कि आरक्षण सामाजिक एकता के उद्देश्य से शुरू किया गया था और जब तक सामाजिक भेदभाव मौजूद है, तब तक आरक्षण भी जारी रहना चाहिए। भागवत ने यह भी कहा कि आरक्षण का उद्देश्य लोगों का उत्थान करना है और इसे हमेशा के लिए बनाए रखने के बजाय जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाने की सोच होनी चाहिए। उन्होंने उप-वर्गीकरण की चर्चा करते हुए कहा कि अगर आरक्षण से जुड़े सभी उपाय ईमानदारी से लागू किए जाएं और सामाजिक भेदभाव खत्म हो, तो भविष्य में इसकी जरूरत कम हो सकती है।
