Paper Leak: 2016 के पेपर लीक मामले पर कांग्रेस पर बरसे राघव चड्ढा, बोले- वही मंत्री फिर जिम्मेदार पद पर क्यों?

राज्यसभा में राघव चड्ढा ने कांग्रेस पर कर्नाटक के 2016 पेपर लीक मामले को लेकर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि विवाद से जुड़े नेता को 2026 में फिर मंत्री बनाना राजनीतिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

Raghav Chadha at Congress Attack: राज्यसभा में सार्वजनिक परीक्षा (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं हैं, बल्कि लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। उनके मुताबिक, वर्षों से लगातार सामने आए ऐसे मामलों ने युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर किया है। चड्ढा ने कहा कि इसी वजह से परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून की जरूरत महसूस हुई।

2016 का मामला उठाया

अपने भाषण के दौरान राघव चड्ढा ने कर्नाटक में वर्ष 2016 में हुए प्री-यूनिवर्सिटी केमिस्ट्री पेपर लीक मामले का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पहली परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा कराई गई परीक्षा का प्रश्नपत्र भी लीक हो गया था। चड्ढा ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री के निजी सहायक को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि इतने बड़े विवाद के बावजूद संबंधित मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा नहीं दिया।

फिर मिली बड़ी जिम्मेदारी

राघव चड्ढा ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2026 में उसी नेता को दोबारा चिकित्सा शिक्षा मंत्री का पद सौंप दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस विभाग में पहले इतना बड़ा विवाद हो चुका था, उसी व्यक्ति को फिर से वही जिम्मेदारी देना किस तरह की जवाबदेही को दर्शाता है। उनके अनुसार, इस फैसले से यह संदेश जाता है कि गंभीर मामलों में भी राजनीतिक जवाबदेही तय नहीं की जाती, जबकि इसका असर सीधे छात्रों और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है।

पुराने मामलों का हवाला

अपने संबोधन में चड्ढा ने यूपीए सरकार के समय सामने आए विभिन्न कथित पेपर लीक मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आईं, लेकिन उस दौरान परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक कानूनी व्यवस्था नहीं बनाई गई। उन्होंने दावा किया कि नया कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, संगठित पेपर लीक गिरोहों पर लगाम लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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