NEET Paper Leak Supreme Court Hearing:सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, नीट यूजी पेपर लीक मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि परीक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। सरकार ने दावा किया कि मौजूदा सिस्टम काफी सुरक्षित है, हालांकि इसमें कुछ स्तर पर इंसानी दखल अभी भी मौजूद है।
सुधारों पर जवाब
नीट यूजी में गड़बड़ियों के बाद एनटीए में सुधार की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने मौजूदा एनटीए को भंग करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को राधाकृष्णन पैनल और नंदन नीलेकणी कमेटी की सिफारिशों पर उठाए गए कदमों की जानकारी हलफनामे के जरिए देने को कहा है।
सरकार ने क्या बताया
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रश्न बैंक तैयार करने के लिए कई मॉडरेटर लगाए जाते हैं। प्रत्येक मॉडरेटर 100-100 सवाल चुनता है और इसी प्रक्रिया से चार अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार होते हैं। मॉडरेटरों को यह जानकारी नहीं होती कि इनमें से कौन-सा प्रश्नपत्र छात्रों को मिलेगा।
प्रश्नपत्र पर कई सुरक्षा
सरकार के अनुसार चार सेटों में से परीक्षा के लिए दो सेट एनटीए महानिदेशक चुनते हैं। प्रश्नपत्रों को विशेष सुरक्षा वाली सील लगे बक्सों में रखा जाता है। सवालों को भी अलग-अलग क्रम में जंबल किया जाता है। 24-24 प्रश्नपत्रों के पैकेट पर वाटरमार्क नंबर, शहर कोड, परीक्षा केंद्र कोड और पैकेट नंबर दर्ज होते हैं। इससे किसी पैकेट की नकल या उसके साथ छेड़छाड़ करना मुश्किल होता है।
छपाई में निगरानी
प्रश्नपत्रों को सीलबंद लिफाफों में दो अलग-अलग प्रिंटिंग प्रेस भेजा जाता है। यहां सीसीटीवी कैमरों और सीआईएसएफ की निगरानी रहती है। प्रिंटिंग के दौरान बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक होती है और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाती है। तैयार प्रश्नपत्रों को विशेष लोहे के बक्सों में रखा जाता है, जिनमें एक बार इस्तेमाल होने वाले ताले लगाए जाते हैं।
यूपीएससी से सीखने की सलाह
सरकार ने बताया कि प्रश्नपत्र ले जाने वाली गाड़ियों में जीपीएस लगाया गया है। गाड़ी की छोटी-सी गतिविधि भी एनटीए मुख्यालय में दर्ज होती है। इसके अलावा डिजिटल लॉक वाले बॉक्स का इस्तेमाल किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की प्रक्रिया सुनने के बाद कहा कि राधाकृष्णन कमेटी इन व्यवस्थाओं की समीक्षा कर चुकी है और संस्थागत समस्याओं की ओर भी इशारा किया था। अदालत ने कहा कि दूरगामी समाधान जरूरी है और एनटीए को यूपीएससी से सीखना चाहिए। विशेषज्ञ अधिकारियों की नियुक्ति पर भी जोर दिया गया, जो बदलती तकनीक और परीक्षा सुरक्षा की चुनौतियों को समझ सकें।
