Rahul Gandhi Defamation Case Supreme Court: राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता से जल्द सुनवाई के लिए उचित प्रक्रिया अपनाने को कहा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि अदालत के सामने हर व्यक्ति समान है। अगर शिकायतकर्ता मामले की जल्दी सुनवाई चाहता है तो उसे इसके लिए अर्ली हियरिंग एप्लिकेशन दाखिल करनी चाहिए।
पांच महीने से लंबित
शिकायतकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया अदालत में पेश हुए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कोई VVIP नहीं हैं, लेकिन मजिस्ट्रेट द्वारा मामले में संज्ञान लिए जाने के खिलाफ उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि इस तरह मामले का लंबित रहना न्यायिक संस्थान के लिए भी अच्छा संकेत नहीं है।
CJI ने दिया जवाब
इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत की प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने शिकायतकर्ता से जल्द सुनवाई की मांग करते हुए आवेदन दाखिल करने को कहा। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि अदालत के सामने सभी लोग बराबर हैं और आवेदन आने के बाद मामले को सुनवाई के लिए लिया जाएगा। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।
बयान से शुरू हुआ विवाद
यह मामला बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन यानी BRO के पूर्व निदेशक उदय शंकर श्रीवास्तव की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि शिकायत से जुड़ा है। विवाद 16 दिसंबर 2022 को दिए राहुल गांधी के उस बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने 9 दिसंबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारत-चीन सैनिकों की झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे।
शिकायत में क्या आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय जवानों की पिटाई कर रहे हैं। इस बयान के खिलाफ वकील विवेक तिवारी ने उदय शंकर श्रीवास्तव की ओर से शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का कहना था कि यह टिप्पणी भारतीय सेना के लिए अपमानजनक और मानहानिकारक है। श्रीवास्तव BRO के पूर्व निदेशक रह चुके हैं और उनका पद सेना में कर्नल के बराबर रैंक का था।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट
लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को मामले में पेश होने के लिए समन जारी किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन उनकी याचिका खारिज हो गई। हाईकोर्ट ने माना कि सेना के प्रति गहरा सम्मान रखने वाला व्यक्ति कथित टिप्पणी से व्यक्तिगत रूप से आहत होने पर कानून के तहत शिकायतकर्ता यानी प्रभावित व्यक्ति माना जा सकता है।
अब आगे क्या
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। शीर्ष अदालत की एक पीठ ने पहले इस मामले की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राहुल गांधी से यह भी पूछा था कि चीन और भारतीय सेना से जुड़े गंभीर मुद्दे संसद के बजाय सोशल मीडिया पर क्यों उठाए गए और उनके बयान का आधार क्या विश्वसनीय सामग्री थी।
