Supreme Court CJP Protest Case:CJP के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा एक छात्र को नोटिस जारी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने इस मामले का उल्लेख किया गया। वकील ने बताया कि पुलिस के अनुरोध पर मजिस्ट्रेट ने यह नोटिस जारी किया था।
आदेश के बाद नोटिस
वकील ने कोर्ट को बताया कि नोटिस अब वापस लिया जा चुका है। हालांकि, सुनवाई के दौरान यह सवाल उठा कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा चुका है, तो इसके बावजूद ऐसा नोटिस कैसे जारी किया गया। कोर्ट ने माना कि इस तरह की कार्रवाई छात्रों के बीच डर पैदा करने वाली हो सकती है।
मजिस्ट्रेट से जवाब
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मामले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। उन्होंने सवाल किया कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं, जबकि शीर्ष अदालत का स्पष्ट निर्देश था कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। पीठ ने आदेश की गंभीरता को भी रेखांकित किया।
छात्र को मिला नोटिस
अधिकारियों के मुताबिक, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जंतर-मंतर पर CJP की अगुवाई में हुए प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में नोटिस दिया गया था। इसमें छात्र से शांति बनाए रखने के लिए पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया था। हालांकि, बाद में यह नोटिस वापस ले लिया गया।
क्या था सुप्रीम कोर्ट आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। केंद्र सरकार की ओर से भी अदालत से इस विशेष शक्ति का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया गया था। ऐसे में नोटिस जारी होने पर कोर्ट ने इसे अपने आदेश के संदर्भ में गंभीरता से लिया।
