PUC Certificate Issue: 10 साल पुरानी लग्जरी वॉल्वो कार के मालिक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया है कि उनकी डीजल कार एमिशन टेस्ट में सफल होने के बावजूद पीयूसी (PUC) सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जा रहा। उनका कहना है कि पीयूसी केंद्रों के सॉफ्टवेयर में लगी तकनीकी रोक के कारण प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहा है। इसके चलते उन्हें पेट्रोल पंपों से ईंधन भी नहीं मिल रहा और वाहन का उपयोग पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
दरअसल, वाई.एन. भारद्वाज ने कोर्ट में आवेदन देकर कहा है कि उनके बेटे की बीएस-IV (BS-IV) डीजल वोल्वो XC-60 का पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) को रिन्यू नहीं किया जा रहा है. PUCC की वैधता 25 फरवरी को खत्म हो गई थी लेकिन PUCC केंद्रों ने यह कहते हुए नया प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार कर दिया कि वाहन 15 साल से ज्यादा पुराना हो चुका है.
कोर्ट में रखी दलील
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश खन्ना ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के सामने कहा कि वोल्वो XC-60 जैसी प्रीमियम कारें लंबे समय तक सुरक्षित और बेहतर स्थिति में चल सकती हैं। केवल तय उम्र पूरी होने के आधार पर ऐसी महंगी गाड़ियों को स्क्रैप करने के लिए मजबूर करना वाहन मालिकों पर बड़ा आर्थिक बोझ डालता है। उन्होंने कहा कि यदि वाहन उत्सर्जन मानकों पर खरा उतर रहा है तो उसे पीयूसी सर्टिफिकेट मिलने से नहीं रोका जाना चाहिए।
सॉफ्टवेयर बना सबसे बड़ी बाधा
याचिका में बताया गया कि पीयूसी सेंटर संचालकों ने वाहन मालिक को स्पष्ट कहा कि उनके सॉफ्टवेयर सिस्टम और जारी दिशा-निर्देश 10 वर्ष की आयु पार कर चुकी डीजल गाड़ियों का पीयूसी सर्टिफिकेट बनाने की अनुमति नहीं देते। यह स्थिति तब भी बनी रहती है जब वाहन उत्सर्जन जांच में पूरी तरह पास हो जाता है। इसी कारण वाहन मालिक अपनी कार के लिए ईंधन भी नहीं खरीद पा रहे हैं और कार उपयोग से बाहर हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है।
पहले क्या कह चुका है सुप्रीम कोर्ट
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस विषय पर संशोधित आदेश जारी कर चुका है। पिछले वर्ष दिल्ली सरकार ने अदालत से अनुरोध किया था कि एनसीआर में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर लगी रोक की वैज्ञानिक समीक्षा कराई जाए। इसके बाद 17 दिसंबर को अदालत ने स्पष्ट किया था कि बीएस-IV और उससे नए उत्सर्जन मानकों वाले ऐसे वाहनों के खिलाफ केवल उम्र के आधार पर कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। यानी उन्हें सिर्फ आयु सीमा पूरी होने के कारण सड़क पर चलने से नहीं रोका जा सकता।
सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब यह मामला पीयूसी सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया और सॉफ्टवेयर आधारित प्रतिबंधों पर नई बहस खड़ी कर सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर वाहन मालिक के पक्ष में कोई स्पष्ट निर्देश देता है, तो इससे एनसीआर सहित उन हजारों वाहन मालिकों को राहत मिल सकती है जिनकी गाड़ियां उत्सर्जन मानकों का पालन करती हैं, लेकिन तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से पीयूसी सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं कर पा रही हैं। आने वाली सुनवाई पर वाहन मालिकों और संबंधित एजेंसियों की नजरें टिकी रहेंगी।
