Bhabanipur Election Result:शुरुआती रुझानों में ममता बनर्जी को सुवेंदु अधिकारी दे रहे कड़ी टक्कर, हाई प्रोफाइल सीट पर सबकी नजर

भवानीपुर सीट पर शुरुआती रुझानों में ममता बनर्जी आगे हैं, लेकिन सुवेंदु अधिकारी कड़ी टक्कर दे रहे हैं। यह हाई प्रोफाइल सीट सामाजिक समीकरण और शहरी वोट बैंक के कारण बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है।

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Bhabanipur Election Result:पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित सीट भवानीपुर से शुरुआती रुझान सामने आ रहे हैं। इन रुझानों में Mamata Banerjee बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि Suvendu Adhikari उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इस सीट पर करीब 86.71 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो लोगों की भारी भागीदारी को दिखाता है।

हमेशा से खास रही यह सीट

कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से राजनीति का केंद्र रही है। यह सीट 1951 से अस्तित्व में है और इसे ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता है। उन्होंने यहां 2011, 2016 और 2021 के उपचुनाव में लगातार जीत दर्ज की है।

नंदीग्राम हार के बाद वापसी

साल 2021 में नंदीग्राम से हारने के बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर से उपचुनाव लड़ा था। उस समय उन्होंने 58 हजार से ज्यादा वोटों से बड़ी जीत हासिल की थी। इस जीत के लिए टीएमसी नेता शोभेनदेव चट्टोपाध्याय ने सीट खाली की थी, जिससे ममता को यहां से चुनाव लड़ने का मौका मिला।

2026 में मुकाबला और दिलचस्प

इस बार का चुनाव और भी ज्यादा रोमांचक माना जा रहा है। भाजपा ने इस सीट पर अपने मजबूत नेता सुवेंदु अधिकारी को उतारा है, जो पहले ममता के करीबी माने जाते थे। अब वही उनके खिलाफ मैदान में हैं, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।

शहरी वोट बैंक का असर

भाजपा ने पिछले कुछ सालों में शहरी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है। 2019 लोकसभा चुनाव के बाद से कोलकाता की कई सीटों पर पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ा है। इसका असर भवानीपुर सीट पर भी देखने को मिल रहा है।

मिनी इंडिया कही जाने वाली सीट

भवानीपुर को ‘मिनी इंडिया’ भी कहा जाता है। यहां बंगाली, मारवाड़ी, गुजराती, सिख और जैन समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। साथ ही मुस्लिम मतदाताओं की भी अच्छी खासी संख्या है, जिससे चुनावी समीकरण काफी संतुलित बनता है।

सामाजिक समीकरण का असर

इस सीट पर करीब 42 प्रतिशत बंगाली हिंदू, 34 प्रतिशत गैर-बंगाली हिंदू और लगभग 24 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। यही सामाजिक संतुलन इस सीट को खास बनाता है और यही वजह है कि यहां हर चुनाव में कड़ी टक्कर देखने को मिलती है।

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