Resignations In Bengal: चुनाव नतीजे आने के अगले ही दिन कई बड़े नामों ने इस्तीफा सौंप दिया। इनमें पूर्व आईएएस अधिकारी, अर्थशास्त्री और मीडिया सलाहकार शामिल हैं। ये सभी लोग ममता बनर्जी की सरकार में अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार ने बताया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन और पश्चिम बंगाल स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है।
उन्होंने कहा कि भले ही वह राजनीति से जुड़े व्यक्ति नहीं हैं, लेकिन उनकी नियुक्ति राजनीतिक आधार पर हुई थी। अब जब ममता बनर्जी चुनाव हार गई हैं, तो उनके पास पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं बचता।
अलापन बंद्योपाध्याय फिर चर्चा में
पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय का नाम भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उन्होंने भी अपना इस्तीफा राज्य सरकार को भेज दिया है। अलापन वही अधिकारी हैं, जिनको लेकर साल 2021 में केंद्र और बंगाल सरकार के बीच बड़ा विवाद हुआ था। चक्रवात ‘यास’ के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक में शामिल न होने के बाद केंद्र सरकार ने उन्हें दिल्ली बुलाने का आदेश दिया था।
हालांकि ममता सरकार ने उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया था। बाद में अलापन बंद्योपाध्याय ने रिटायरमेंट ले लिया और ममता बनर्जी ने उन्हें अपना मुख्य सलाहकार बना दिया था।
कई और अधिकारियों ने छोड़े पद
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्य सचिव एचके द्विवेदी और मनोज पंत ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। दोनों रिटायरमेंट के बाद ममता सरकार में सलाहकार के तौर पर काम कर रहे थे। इसके अलावा सूचना एवं संस्कृति विभाग में मीडिया सलाहकार के रूप में काम कर रहे एक पूर्व पत्रकार ने भी पद छोड़ दिया है।
ममता ने हार मानने से किया इनकार
इन इस्तीफों के बीच ममता बनर्जी अब भी मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि चुनाव में धांधली हुई है और वोटों की गिनती के दौरान चुनाव आयोग, केंद्रीय बलों और बीजेपी ने मिलकर गड़बड़ी की।
वहीं राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने भी अपना इस्तीफा राज्यपाल आरएन रवि को भेज दिया है।
बीजेपी ने दर्ज की बड़ी जीत
बता दें कि पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की है। 294 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी को 207 सीटें मिली हैं, जबकि टीएमसी केवल 80 सीटों पर सिमट गई। चुनाव नतीजों के बाद अब बंगाल की राजनीति में लगातार नए घटनाक्रम देखने को मिल रहे हैं।
