TMC vs EC Row: बंगाल चुनाव में काउंटिंग से पहले बवाल, स्ट्रांगरूम को लेकर क्यों TMC और चुनाव आयोग आए आमने-सामने

पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों से पहले टीएमसी ने स्ट्रांगरूम को लेकर गंभीर आरोप लगाए। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सुरक्षा को पूरी तरह पुख्ता बताया। विवाद के बीच राजनीतिक माहौल गर्म हो गया।

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West Bengal Election Controversy: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दोनों चरण पूरे हो चुके हैं और अब सबकी नजर 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी है। इसी बीच राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

मतगणना से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने एक कथित सीसीटीवी वीडियो जारी किया है, जिसमें चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। इस वीडियो को लेकर राज्य में सियासी माहौल और ज्यादा गरम हो गया है।

टीएमसी के आरोप क्या हैं

टीएमसी का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग की मिलीभगत से नियमों का उल्लंघन किया गया है। पार्टी का कहना है कि बिना किसी पार्टी प्रतिनिधि की मौजूदगी के बैलेट बॉक्स खोले गए हैं, जो लोकतंत्र के खिलाफ है। टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा करते हुए इसे “दिन-दहाड़े लोकतंत्र की हत्या” बताया है। पार्टी का दावा है कि यह घटना चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।

धरने पर बैठे टीएमसी नेता

इन आरोपों के बाद टीएमसी के कई नेता मैदान में उतर आए हैं। उम्मीदवार कुणाल घोष और शशि पांजा ने खुदीराम अनुशीलन केंद्र पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।।वे स्ट्रांगरूम के बाहर धरने पर बैठ गए और अनियमितताओं की जांच की मांग करने लगे। पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी वहां जमा होकर विरोध जताया।

कुणाल घोष ने क्या कहा

कुणाल घोष ने बताया कि दोपहर करीब 3:30 बजे तक पार्टी के कार्यकर्ता स्ट्रांगरूम के बाहर मौजूद थे। अचानक एक ईमेल आया, जिसमें कहा गया कि शाम 4 बजे स्ट्रांगरूम दोबारा खोला जाएगा। उन्होंने कहा कि उस समय तक उनके कार्यकर्ता वहां से जा चुके थे। जैसे ही यह जानकारी मिली, वे तुरंत वहां पहुंचे, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी तरफ भाजपा के लोगों को अंदर बुलाया जा रहा था।

चुनाव आयोग का जवाब

टीएमसी के इन आरोपों पर चुनाव आयोग ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। आयोग ने सभी आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। चुनाव आयोग का कहना है कि सभी स्ट्रांगरूम पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें सख्त निगरानी में रखा गया है। आयोग ने भरोसा दिलाया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जा रही है।

बढ़ता राजनीतिक तनाव

इस पूरे विवाद के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है। नतीजों से पहले ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अब सबकी नजर 4 मई पर है, जब यह साफ होगा कि जनता ने किसे सत्ता की जिम्मेदारी सौंपी है।

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