Nippon India: नया एनएफओ में निवेश का मौका,टैक्स बचत के साथ कम उतार-चढ़ाव में रिटर्न का बेहतरीन मौका

निप्पॉन इंडिया का नया फंड ऑफ फंड 31 अगस्त तक निवेश के लिए खुला है। इसमें आर्बिट्राज और डेट फंड का मिश्रण है, जो कम उतार-चढ़ाव, टैक्स दक्षता और स्थिर रिटर्न पर केंद्रित है।

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Mutual Funds:निवेशकों की कोशिश रहती है कि उनका पैसा ऐसे विकल्प में लगाया जाए, जहां जोखिम बहुत ज्यादा न हो और रिटर्न के साथ टैक्स का फायदा भी मिल सके। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड ने नया फंड ऑफर यानी एनएफओ लॉन्च किया है। इसका नाम निप्पॉन इंडिया इनकम प्लस आर्बिट्राज ओम्नी फंड ऑफ फंड है। यह एनएफओ 17 अगस्त 2026 को खुला है और इसमें 31 अगस्त 2026 तक निवेश किया जा सकता है। फंड का उद्देश्य बाजार में उतार-चढ़ाव को सीमित रखते हुए बेहतर जोखिम-समायोजित रिटर्न देना है।

कैसे काम करेगा फंड

यह फंड अपने कुल निवेश का करीब 95% से 100% हिस्सा आर्बिट्राज म्यूचुअल फंड, सक्रिय डेट म्यूचुअल फंड और निष्क्रिय डेट म्यूचुअल फंड के संयोजन में लगाता है। वहीं अधिकतम 5% रकम डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में रखी जा सकती है। फंड आर्बिट्राज योजनाओं में कम से कम 35% निवेश करेगा, जबकि सक्रिय डेट, निष्क्रिय डेट और मनी मार्केट में कुल निवेश 65% से कम रखा जाएगा। इस तरह एक ही फंड के जरिए निवेशकों को अलग-अलग रणनीतियों का मिश्रण मिलता है।

टैक्स में मिल सकता है लाभ

इस फंड की संरचना टैक्स के लिहाज से भी इसे दिलचस्प बनाती है। अगर निवेशक अपनी यूनिट्स को 24 महीने से ज्यादा समय तक बनाए रखते हैं, तो उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुनाफे पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के तहत 12.5% टैक्स लागू हो सकता है। वहीं 24 महीने से कम अवधि में यूनिट बेचने पर मुनाफे पर निवेशक के लागू टैक्स स्लैब के अनुसार कर लग सकता है। हालांकि, निवेश से पहले मौजूदा टैक्स नियमों और अपनी व्यक्तिगत स्थिति की पुष्टि करना जरूरी है।

एक फंड में कई रणनीतियां

इस एनएफओ की खासियत यह है कि इसमें डेट और आर्बिट्राज दोनों तरह की रणनीतियों को एक साथ शामिल किया गया है। आमतौर पर निवेशक इन रणनीतियों का फायदा लेने के लिए अलग-अलग म्यूचुअल फंड चुनते हैं। यहां फंड मैनेजर ही अलग-अलग अंडरलाइंग स्कीम के चयन और उनके बीच रकम के आवंटन का फैसला करता है। जरूरत के अनुसार पोर्टफोलियो में शामिल योजनाओं को रीबैलेंस भी किया जा सकता है। इससे निवेशक को खुद बार-बार अलग-अलग फंड में स्विच करने की जरूरत कम हो जाती है।

रिटर्न का तरीका

फंड का डेट हिस्सा अपेक्षाकृत स्थिर और जोखिम-समायोजित रिटर्न हासिल करने पर केंद्रित रहेगा, जबकि आर्बिट्राज हिस्सा बाजार में मौजूद कीमतों के अंतर का फायदा उठाने की रणनीति अपनाएगा। यह विकल्प खासतौर पर उन निवेशकों के लिए उपयोगी हो सकता है जो ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का जोखिम सीमित रखना चाहते हैं और करीब दो से तीन साल की निवेश अवधि रखते हैं। हालांकि, म्यूचुअल फंड में रिटर्न की गारंटी नहीं होती और बाजार से जुड़े जोखिम बने रहते हैं। निवेश से पहले प्रमाणित निवेश सलाहकार से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी उपलब्ध विवरण पर आधारित है। म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले प्रमाणित निवेश सलाहकार से सलाह लें।

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