सहारा इंडिया के प्रमुख सुब्रत रॉय के निधन के बाद करोड़ों निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनका फंसा हुआ पैसा अब कौन वापस कर रहा है। सुब्रत रॉय के रहते सहारा समूह की पूरी जिम्मेदारी उनके हाथ में थी, लेकिन उनके निधन के बाद समूह का ढांचा बदल चुका है।
ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि सहारा का रिफंड फिलहाल किस संस्था के जरिए हो रहा है और इस पूरी प्रक्रिया पर कानूनी नियंत्रण किसका है।
परिवार संभाल रहा कामकाज
सुब्रत रॉय के निधन के बाद उनकी पत्नी स्वप्ना रॉय और दोनों बेटे सुशांतो रॉय तथा सीमांतो रॉय सहारा इंडिया परिवार के कामकाज को संभाल रहे हैं। कंपनी की ओर से कहा गया था कि संगठन सुब्रत रॉय की सोच और उनकी विरासत को आगे बढ़ाता रहेगा।
हालांकि निवेशकों के पैसे की वापसी अब केवल सहारा परिवार के हाथ में नहीं है। यह मामला पहले ही अदालत और सरकार की निगरानी में जा चुका है।
रिफंड की जिम्मेदारी
निवेशकों को पैसा लौटाने की प्रक्रिया में सहकारिता मंत्रालय के तहत काम करने वाला सीआरसीएस अहम भूमिका निभा रहा है। जुलाई 2023 में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल की शुरुआत की थी।
सीआरसीएस यानी सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज सहारा समूह की चार सहकारी समितियों से जुड़े दावों की प्रक्रिया देखता है। पात्र निवेशकों के दावों की जांच के बाद रिफंड उनके आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजा जाता है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी
इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। अदालत के आदेश के बाद सेबी के पास मौजूद सहारा-सेबी रिफंड खाते से रकम सीआरसीएस को ट्रांसफर की गई, ताकि इसे निवेशकों तक पहुंचाया जा सके।
शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने 5,000 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। बाद में यह रकम बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपये कर दी गई।
परिवार के हाथ में नियंत्रण नहीं
इस व्यवस्था का मतलब यह है कि निवेशकों के रिफंड की रकम पर सहारा समूह या सुब्रत रॉय के परिवार का सीधा नियंत्रण नहीं है। पैसा अदालत के निर्देशों और सरकार, सीआरसीएस तथा संबंधित संस्थाओं की निगरानी वाली व्यवस्था के जरिए निवेशकों तक पहुंचाया जा रहा है।
इसलिए जिन लोगों का पैसा सहारा की चार सहकारी समितियों में फंसा है, उनके लिए रिफंड प्रक्रिया का सबसे अहम रास्ता सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल है।
निवेशकों को क्या समझना चाहिए
सहारा से पैसा वापस मिलने का मामला अब केवल कंपनी से संपर्क करने तक सीमित नहीं है। निवेशकों के दावों की जांच और भुगतान की प्रक्रिया निर्धारित सरकारी और न्यायिक व्यवस्था के तहत चल रही है।
यानी सुब्रत रॉय के निधन के बाद भी निवेशकों के रिफंड की प्रक्रिया बंद नहीं हुई है। इसकी कमान अब सहारा परिवार के बजाय अदालत के निर्देशों और सरकारी तंत्र के हाथ में है।

