UPI MDR Update: देश में डिजिटल भुगतान की सबसे लोकप्रिय व्यवस्था यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर बड़ा बदलाव सामने आ सकता है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (Payment and Settlement Systems) कानून में संशोधन विधेयक पेश किया है। इस प्रस्ताव के बाद बड़े व्यापारियों से UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूले जाने की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, फिलहाल आम ग्राहकों पर किसी तरह का शुल्क लगाने का प्रस्ताव नहीं है।
किन व्यापारियों पर लग सकता है शुल्क?
रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार दो प्रमुख विकल्पों पर विचार कर रही है। पहला, एक तय सीमा से अधिक राशि वाले UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू किया जाए। दूसरा, व्यापारी के सालाना कारोबार के आधार पर शुल्क तय किया जाए। एक प्रस्ताव के मुताबिक 1.5 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाले व्यापारियों के 2,000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर 0.3% से 0.5% तक MDR लगाया जा सकता है। हालांकि, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
क्यों उठी MDR लागू करने की मांग?
डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री लंबे समय से कह रही है कि UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त होने के कारण पेमेंट कंपनियों के लिए नेटवर्क में निवेश और विस्तार करना मुश्किल होता जा रहा है। उद्योग का तर्क है कि बड़े व्यापारियों से सीमित MDR वसूलने से डिजिटल भुगतान ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी, जबकि छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
UPI का बढ़ता दायरा
UPI आज दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट नेटवर्क में शामिल है। जुलाई 2026 में इसके जरिए 23.6 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये रही। इस बाजार में PhonePe और Google Pay जैसी कंपनियों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है।
क्या अभी देना होगा कोई चार्ज?
फिलहाल UPI भुगतान पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त है। संसद में पेश किया गया संशोधन केवल भविष्य में MDR लागू करने के लिए कानूनी आधार तैयार करता है। सरकार ने अभी यह तय नहीं किया है कि शुल्क कब लागू होगा, कितना होगा और किन लेनदेन पर लागू किया जाएगा।
