Bihar New Cabinet: विकास का नया दौर शुरू, सम्राट चौधरी सरकार का हुआ गठन, सहयोगी दलों सहित 32 को मिली जगह

बिहार में नई एनडीए सरकार का गठन हो गया है। सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 21 साल बाद नीतीश कुमार का दौर खत्म हुआ। नई कैबिनेट में बीजेपी, जेडीयू और सहयोगी दलों के कुल 32 मंत्रियों को जगह मिली।

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Bihar New Cabinet 2026: बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर राज्य में नई सरकार की शुरुआत की। इसके साथ ही नीतीश कुमार के 21 साल लंबे शासन का अंत हो गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने नई सरकार के मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

नई एनडीए सरकार में कुल 32 मंत्रियों को शामिल किया गया है। ये मंत्री बीजेपी, जेडीयू, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे दलों से आते हैं। शपथ लेने वाले कई नेता पहले भी नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रह चुके हैं।

नई सरकार में बड़े चेहरे

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। दोनों नेता जनता दल यूनाइटेड से आते हैं। नई कैबिनेट में राम कृपाल यादव, नितिश मिश्रा, विजय कुमार सिन्हा, दिलीप जायसवाल, श्रवण कुमार, लेसी सिंह और अशोक चौधरी जैसे कई अनुभवी नेताओं को जगह मिली है।
इस बार निशांत कुमार को भी मंत्री बनाया गया है, जिसकी चर्चा पहले से ही राजनीतिक गलियारों में चल रही थी। इसके अलावा संजय सिंह टाइगर, दामोदर रावत और श्वेता गुप्ता जैसे नए और पुराने चेहरों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सहयोगी दलों को भी मिला मौका

एनडीए के सहयोगी दलों को भी सरकार में अच्छी भागीदारी दी गई है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से संजय कुमार पासवान और संजय कुमार सिंह को मंत्री बनाया गया है।

वहीं, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) से संतोष कुमार सुमन और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से दीपक प्रकाश को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है। दोनों नेता केंद्रीय मंत्रियों जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं।

बीजेपी और जेडीयू के बीच संतुलन

नई सरकार में बीजेपी और जेडीयू के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश साफ दिखाई दी। जेडीयू को कुल 15 मंत्री पद मिले हैं। वहीं बीजेपी ने भी अपने कई बड़े और क्षेत्रीय नेताओं को कैबिनेट में जगह देकर सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह नई टीम 2026 के बाद बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नई सरकार जनता से जुड़े मुद्दों पर कितना तेज और प्रभावी काम करती है।

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