Bihar New CM : कैडर बेस्ड पार्टी BJP का बदलता राजनीतिक ट्रेंड, क्यों दूसरे दलो से आ रहे नेताओं को बना रही CM

सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। बीजेपी ने एक बार फिर दूसरे दल से आए नेता पर भरोसा जताया है। यह पार्टी की बदलती रणनीति और सियासी सोच को दिखाता है।

Bihar New CM: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सम्राट चौधरी जल्द ही राज्य के नए मुख्यमंत्री बन सकते हैं। खबर है कि वह 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से की थी, फिर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के रास्ते भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए।

BJP का बदलता राजनीतिक ट्रेंड

भारतीय जनता पार्टी को लंबे समय तक एक कैडर बेस्ड पार्टी माना जाता रहा है, जहां RSS और पार्टी से जुड़े नेताओं को ही ज्यादा प्राथमिकता मिलती थी। लेकिन अब समय के साथ पार्टी की रणनीति में बदलाव देखने को मिल रहा है। सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाना इसी बदलाव का एक उदाहरण माना जा रहा है।

पहले भी कई नेताओं को मिला मौका

सम्राट चौधरी से पहले भी बीजेपी ने कई ऐसे नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया है, जो पहले दूसरे दलों में थे। नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को छोड़ दें, तो यह तीसरी बार है जब पार्टी ने किसी बाहरी नेता को मुख्यमंत्री बनाया है। अगर नॉर्थ ईस्ट को जोड़ लिया जाए, तो यह आंकड़ा 8 तक पहुंच जाता है।

हिमंता बिस्वा सरमा का उदाहरण

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पहले कांग्रेस में थे और तरुण गोगोई सरकार में मंत्री रह चुके थे। साल 2015 में उन्होंने बीजेपी जॉइन की और बाद में 2021 में मुख्यमंत्री बने। उन्होंने नॉर्थ ईस्ट में बीजेपी को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई।

पेमा खांडू और माणिक साहा

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी पहले कांग्रेस में थे। बाद में उन्होंने अपने समर्थकों के साथ बीजेपी जॉइन कर ली और फिर मुख्यमंत्री बने। वहीं त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा भी कांग्रेस से बीजेपी में आए और उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई।

अन्य राज्यों के नेता भी शामिल

मणिपुर के एन बीरेन सिंह, कर्नाटक के बसवराज बोम्मई और असम के सर्बानंद सोनोवाल भी ऐसे नेता हैं, जो दूसरे दलों से बीजेपी में आए और मुख्यमंत्री बने। झारखंड के अर्जुन मुंडा और अरुणाचल प्रदेश के गेगोंग अपांग का नाम भी इस सूची में शामिल है।

सियासी रणनीति का नया संकेत

इन सभी उदाहरणों से साफ होता है कि बीजेपी अब केवल अपने पुराने ढांचे तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी अब दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को भी बड़े पद देने से पीछे नहीं हट रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी जीत और सत्ता को प्राथमिकता दे रही है।

आगे क्या असर पड़ेगा

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से बिहार की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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