NMACC Security: रिपोर्टों के मुताबिक, घटना सोमवार यानी 7 सितंबर को मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में हुई। NMACC और आसपास के इलाके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले दिन होने वाले कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी।
सुरक्षा जांच के दौरान रोहन पारेख पर संदेह हुआ। पुलिस के अनुसार, उसके पास PMO से जुड़ा हुआ पहचान पत्र था, जिसे जांच के दौरान कथित तौर पर संदिग्ध पाया गया। इसके बाद पुलिस ने पारेख और उसके साथ मौजूद व्यक्ति को हिरासत में लिया।
बॉडीगार्ड के पास मिला लाइसेंसी हथियार
पुलिस के मुताबिक, पारेख के साथ मौजूद दिलीप कुंडे ने खुद को उसका बॉडीगार्ड बताया था। जांच के दौरान उसके पास हथियार मिला। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हथियार लाइसेंसी था और मामले में उसकी वैधता की भी जांच की जा रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों वहां किस उद्देश्य से पहुंचे थे और कथित PMO पहचान पत्र उन्हें कैसे मिला।
आरोपी के वकील ने रखा अलग पक्ष
कोर्ट में पारेख के वकील ने आरोपों पर अलग पक्ष रखा। बचाव पक्ष का कहना है कि पारेख को कथित तौर पर एक ऑफर लेटर, पहचान पत्र और PMO से संबंधित कुछ दस्तावेज मिले थे। वकील ने दावा किया कि पारेख खुद किसी धोखाधड़ी का शिकार हो सकता है और उसे इन दस्तावेजों की वास्तविकता के बारे में गलत जानकारी दी गई थी। इस दावे की पुष्टि अभी जांच के जरिए होनी बाकी है।
11 सितंबर तक पुलिस कस्टडी
रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तार दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें 11 सितंबर तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया। जांच एजेंसियां उनके मोबाइल फोन, दस्तावेजों और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।
इस मामले में एक अन्य व्यक्ति के फरार होने की भी रिपोर्ट है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है और पूरे घटनाक्रम में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है।
PM मोदी के कार्यक्रम से सीधे लिंक की पुष्टि नहीं
यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 8 सितंबर को BKC स्थित जियो वर्ल्ड सेंटर में Global Fintech Fest 2026 के कार्यक्रम में शामिल होने से एक दिन पहले सामने आई। हालांकि, पुलिस ने बाद में स्पष्ट किया कि गिरफ्तार लोगों और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। मामले को फिलहाल सुरक्षा और कथित फर्जी पहचान पत्र के इस्तेमाल की जांच के तौर पर देखा जा रहा है।
