Bill Passed: लोकसभा ने मंगलवार (4 अगस्त) को टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 को बेहद कम समय में पारित कर दिया। उस दौरान सदन में विपक्ष अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर हंगामा कर रहा था। इसी बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोपहर 2:12 बजे विधेयक पेश किया और लगभग तीन मिनट बाद, 2:15 बजे इसे मंजूरी मिल गई। बिना विस्तृत चर्चा के पारित हुए इस विधेयक ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा पैदा कर दी। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य भारत में निवेश और कारोबार के लिए अधिक भरोसेमंद माहौल तैयार करना है।
निवेश पर फोकस
सरकार के अनुसार यह विधेयक विदेशी निवेशकों के लिए नीतिगत स्पष्टता और प्रक्रियागत स्थिरता सुनिश्चित करेगा। इसमें विदेशी निवेश को भारत में स्थायी कारोबार की श्रेणी में न मानने का प्रस्ताव है, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की कर संबंधी आशंकाएं कम होंगी। साथ ही वैश्विक निवेश कोषों का संचालन करने वाले फंड मैनेजरों के लिए भारत में काम करना आसान बनाया जाएगा। पहले कई जटिल शर्तों के कारण विदेशी फंड मैनेजर भारत आने से बचते थे, लेकिन नए प्रावधानों से केवल आवश्यक नियम ही लागू रहेंगे ताकि निवेश बढ़ाने के साथ दुरुपयोग पर भी रोक बनी रहे।
डेटा सेंटर राहत
विधेयक में डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाओं से जुड़े नियमों को भी सरल बनाने का प्रस्ताव है। अब भारतीय डेटा सेंटर का उपयोग करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए बहुस्तरीय सरकारी मंजूरी की आवश्यकता समाप्त की जाएगी। इसके अलावा डेटा सेंटर को केवल प्रत्यक्ष स्वामित्व के बजाय लीज (पट्टे) के आधार पर संचालित करने की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे वैश्विक क्लाउड कंपनियां भारत में अधिक निवेश करेंगी और देश डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा केंद्र बन सकेगा।
उद्योग को बढ़ावा
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को मजबूत करने के लिए विधेयक में मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और उनके प्रमुख पुर्जों से जुड़ी विदेशी कंपनियों को आयकर छूट की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। यह छूट अब वित्त वर्ष 2040-41 तक जारी रखने की योजना है। साथ ही कस्टम्स वेयरहाउस में पुर्जे रखने वाली विदेशी कंपनियों को भी कर राहत मिलेगी, जिससे भारत में अनुबंध आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य वैश्विक कंपनियों को भारत में उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
अन्य अहम बदलाव
विधेयक में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) के निवेशकों को भी राहत देने का प्रस्ताव है। यदि संबंधित कंपनी नई आयकर व्यवस्था अपनाती है, तब भी निवेशकों को मिलने वाला लाभांश कर-मुक्त रहेगा। इसके अलावा संदाय एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन कर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधान में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का कहना है कि इन सभी कदमों का मकसद भारत को वैश्विक पूंजी, विनिर्माण और डिजिटल कारोबार के लिए अधिक आकर्षक और भरोसेमंद गंतव्य बनाना है।
