Supreme Court: बेनामी संपत्ति पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा फैसला, पुराने मामलों मे भी आयकर कर सकेगा कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि 2016 से पहले की बेनामी संपत्तियों की भी जांच और जब्ती हो सकती है। हालांकि पुराने मामलों में नई सजा लागू नहीं होगी। फैसले से आयकर विभाग को बड़ी ताकत मिली है।

Supreme Court On Benami Property: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बेनामी संपत्तियों को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि आयकर विभाग अब 2016 से पहले किए गए बेनामी लेनदेन की भी जांच कर सकता है और ऐसी संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार रखता है। इस फैसले के बाद उन लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जिन्होंने अपनी जमीन, मकान या नकदी किसी रिश्तेदार, ड्राइवर, कुक या दूसरे व्यक्ति के नाम पर छिपाकर रखी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट के इस फैसले से कई पुराने मामलों को दोबारा खोला जा सकता है। अब जांच एजेंसियां सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि संपत्ति के असली मालिक तक पहुंचने की कोशिश करेंगी।

कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में हुए बेनामी कानून संशोधन को लेकर कई अहम बातें स्पष्ट की हैं। अदालत ने कहा कि कानून का वह हिस्सा, जो जांच, प्रक्रिया और संपत्ति जब्त करने से जुड़ा है, उसे पिछली तारीख से भी लागू किया जा सकता है।

इसका मतलब है कि नवंबर 2016 से पहले किए गए बेनामी सौदे भी अब जांच के दायरे में आएंगे। अगर कोई संपत्ति बेनामी पाई जाती है, तो सरकार उसे अपने कब्जे में ले सकती है।

सजा को लेकर भी साफ निर्देश

कोर्ट ने यह भी कहा कि 2016 से पहले हुए मामलों में नई सजा लागू नहीं होगी। यानी ऐसे मामलों में 7 साल तक की जेल की सजा नहीं दी जाएगी। हालांकि पुराने कानून के तहत अधिकतम 3 साल तक की सजा दी जा सकती है। इसके साथ ही पुराने मामलों में जुर्माने का प्रावधान भी लागू नहीं होगा। अदालत ने साफ किया कि पुराने और नए मामलों में सजा के नियम अलग-अलग रहेंगे।

वसीयत के जरिए बच नहीं पाएगी संपत्ति

अक्सर लोग बेनामी संपत्ति को कानूनी रूप देने के लिए वसीयत का सहारा लेते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस रास्ते पर भी सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि अगर कोई संपत्ति बेनामी तरीके से खरीदी गई है, तो उसे वसीयत या उत्तराधिकार के जरिए असली मालिक तक पहुंचाना भी गलत माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून चुप नहीं बैठेगा और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई होगी।

बेनामी कानून में क्या है सजा?

बेनामी संपत्ति कानून के तहत सरकार संपत्ति को जब्त कर सकती है। इसके अलावा संपत्ति की बाजार कीमत का 25 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं 2016 के बाद के मामलों में 7 साल तक की जेल का प्रावधान भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद आयकर विभाग को 20 से 30 साल पुराने संदिग्ध मामलों की जांच करने की ताकत मिल गई है। टैक्स मामलों के जानकार राहुल गर्ग ने कहा कि अब साफ संदेश है कि व्यक्ति चाहे बच जाए, लेकिन बेनामी संपत्ति सुरक्षित नहीं रहेगी।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला मंजुला और अन्य बनाम डी. ए. श्रीनिवास से जुड़ा था। इसमें एक व्यक्ति ने वसीयत के आधार पर कुछ संपत्तियों पर मालिकाना हक जताया था। जांच में पता चला कि जमीन सुधार कानूनों से बचने के लिए ये संपत्तियां किसी और के नाम पर खरीदी गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया और सरकार को 8 हफ्तों के भीतर संपत्तियों पर कब्जा लेने का आदेश दिया।

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