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Supreme Court का सख्त रुख, किस महिला अधिकारी को स्थायी कमीशन ना देने पर तटरक्षक बल को लगाई फटकार

Court’s Stand: भारतीय तटरक्षक बल में लैंगिक समानता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। महिला अधिकारी प्रियंका त्यागी को स्थायी कमीशन देने से इनकार करने के मामले में कोर्ट ने तटरक्षक बल को फटकार लगाई। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि किसी महिला अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि अब अत्यधिक तकनीकी आपत्तियों के आधार पर महिला अधिकारियों के अधिकारों को नहीं रोका जा सकता।

नीति पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने तटरक्षक बल की हालिया नीति को अस्पष्ट और मनमाना बताया। पीठ ने सवाल किया कि अगर पुरुष अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जा सकता है, तो महिला अधिकारियों को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि हर बार कोई नया तकनीकी आधार बताकर महिला अधिकारी के रास्ते में बाधा नहीं डाली जा सकती। पीठ ने तटरक्षक बल के रुख को लेकर कड़ी नाराजगी जताई।

दो सप्ताह की मोहलत

सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को दो सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस अवधि में तटरक्षक बल प्रियंका त्यागी को स्थायी कमीशन देने पर फैसला करे। ऐसा नहीं होने की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट खुद उनके स्थायी समावेशन का आदेश जारी कर सकता है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

प्रियंका की उपलब्धियां

प्रियंका त्यागी ने भारतीय तटरक्षक बल में 14 वर्षों से अधिक समय तक सेवा दी है। वह पूर्वी क्षेत्र में डोर्नियर विमान उड़ाने वाली पहली महिला चालक दल अधिकारी के रूप में भी काम कर चुकी हैं। उनके नाम पुरुष और महिला दोनों अधिकारियों में वरिष्ठता के आधार पर करीब 4,500 उड़ान घंटे दर्ज होने का दावा किया गया है। समुद्री अभियानों के दौरान उन्होंने 300 से अधिक लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सेवा से हटाने का आदेश

इतनी लंबी और महत्वपूर्ण सेवा के बावजूद प्रियंका त्यागी को सेवा से मुक्त करने के निर्देश दिए गए थे। इसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि तटरक्षक बल अपनी निष्क्रियता का फायदा नहीं उठा सकता। पीठ ने लैंगिक भेदभाव और असमानता को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की और कहा कि ऐसी व्यवस्था में बदलाव जरूरी है।

सुविधाओं का तर्क खारिज

तटरक्षक बल की ओर से महिलाओं के लिए बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की कमी का तर्क दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि सुविधाओं या बुनियादी ढांचे की कमी को महिलाओं के अधिकारों से इनकार करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। पीठ ने सेना, वायुसेना और नौसेना से जुड़े पहले के फैसलों का भी संदर्भ दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तारीख तय की।

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