Coronavirus का कहर सिर्फ लोगों की ज़िंदगी पर ही नहीं बल्कि देश दुनिया की Economy पर भी पढ़ रहा है। ऐसा नहीं है की जब तक Coronavirus का खतरा है तब तक ही Economy ख़राब रहेगी। इसका असर बहुत बाद तक भी देखने को मिलेगा।

IMF (International Monetary Fund) की प्रमुख ने 15 अप्रैल को कहा कि Coronavirus Pandemic की वजह से सदस्य देश मदद की भारी मांग कर रहे हैं। IMF की Managing director क्रिस्टालिना जॉर्जिवा ने कहा कि अप्रत्याशित तरीके से 189 सदस्य देशों में से 102 देश अब तक मदद की मांग कर चुके हैं। उन्होंने विश्वबैंक के साथ सालाना Summer meeting की शुरुआत पर एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि IMF मदद की मांग को पूरा करने के लिये एक हजार अरब डॉलर की पूरी क्षमता के कर्ज वितरित करने के लिये प्रतिबद्ध है।

देश ही नहीं बल्कि दुनिया भी इस वक़्त Corona की मार झेल रहा है। अभी ये Virus कितनी तबाही मचाएगा ये कह पाना मुश्किल है। IMF की Managing director ने ये भी कहा कि यह एक ऐसा संकट है जो पहले कभी नहीं देखा गया। जॉर्जीवा ने फिर से दोहराया कि इस महामारी के कारण Global Economy 1930 दशक की महान Financial Crisis के बाद के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। IMF प्रमुख और विश्वबैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास दोनों ने जी20 देशों के वित्त मंत्रियों और Central bank के गर्वनरों द्वारा गरीब देशों के लिये कर्ज की किस्तों की देनदारी निलंबित करने के निर्णय की सराहना की।

उन्होंने और विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास, दोनों ने 20 प्रमुख Industrial Countries के समूह के वित्त मंत्रियों और Central bank अध्यक्षों द्वारा 15 अप्रैल को लिए गए एक निर्णय की प्रशंसा की, जो कम आय वाले देशों के लिए लोन के किस्त भुगतान के निलंबन की घोषणा की। इस साल के अंत में 1 मई से लोन भुगतान के निलंबन से गरीब देशों को 12 अरब डॉलर फंड मिलेगा, जिसका उपयोग वे हेल्थ केयर और Coronavirus से पैदा हुई अन्य जरूरतों को पूरा करने में खर्च करेंगे।

IMF के नए आकलन के मुताबिक, इस महामारी के कारण Global Economy में 3% की गिरावट आ सकती है। Global Financial Crisis के दौरान 2009 में Global Economy में 0.1 प्रतिशत की गिरावट आयी थी। जॉर्जीवा ने कहा कि IMF पहले ही आपातकालीन मदद कार्यक्रमों को 50 करोड़ डॉलर से बढ़ा कर 100 करोड़ डॉलर कर चुका है। उन्होंने कहा कि IMF इसके साथ ही इस बात की भी तैयारी कर रहा है कि जैसे ही Economies इस संकट से उबरना शुरू करें, उनकी गतिविधियां पुन: शुरू की जा सकें।