Karnataka cinema ticket price: कर्नाटक सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पूरे राज्य में सिनेमा टिकटों की अधिकतम कीमत 200 रुपये तय करने का प्रस्ताव दिया है। मसौदा अधिसूचना के अनुसार यह नियम मल्टीप्लेक्स समेत सभी सिनेमाघरों और भाषाओं की फिल्मों पर लागू होगा। इस कदम का उद्देश्य कन्नड़ और अन्य क्षेत्रीय सिनेमा को बढ़ावा देना, आम दर्शकों के लिए टिकट को सुलभ बनाना और सिनेमा को एक सर्वसुलभ सांस्कृतिक अनुभव में बदलना है। मसौदे को सार्वजनिक सुझावों के लिए 15 दिनों तक खोला गया है। सरकार का मानना है कि यह कदम सिनेमा प्रेमियों के लिए राहत लेकर आएगा, जबकि मल्टीप्लेक्स मालिकों को इससे नुकसान और कानूनी लड़ाई की आशंका है।
एक समान दर, सभी के लिए एक जैसा टिकट
Karnataka सिनेमाज (रेगुलेशन) नियम, 2014 में प्रस्तावित संशोधन के तहत अब राज्य के किसी भी सिनेमा हॉल में टिकट की कीमत 200 रुपये से अधिक नहीं होगी, चाहे वह मल्टीप्लेक्स हो या सिंगल स्क्रीन थिएटर। मनोरंजन कर समेत यह सीमा हर शो पर लागू होगी। सीटों की श्रेणी जैसे कि बालकनी, प्रीमियम या रिक्लाइनर जैसी विभाजन प्रणाली को भी समाप्त करने का प्रस्ताव है, जिससे टिकट की कीमतें एक समान रहेंगी।
मुख्यमंत्री का बयान: क्षेत्रीय सिनेमा को मिलेगा बल
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बजट भाषण में इस प्रस्ताव का संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि सरकार चाहती है कि सिनेमा आम जनता के लिए एक किफायती और सांस्कृतिक अनुभव बने। साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों को विशेष प्रोत्साहन देने की बात कही थी, जिससे राज्य के निर्माता-निर्देशकों को भी फायदा मिलेगा।
उद्योग की प्रतिक्रिया: समर्थन और विरोध दोनों
Karnataka फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स और फिल्म एग्जिबिटर्स एसोसिएशन जैसे संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, जबकि पीवीआर-इनॉक्स जैसे मल्टीप्लेक्स संचालकों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि IMAX, 4DX जैसे प्रीमियम फॉर्मेट्स के लिए अधिक मूल्य उचित है, और यह प्रस्ताव उनके व्यापार को घाटे में डाल सकता है। 2017 में इसी तरह के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी।
सार्वजनिक प्रतिक्रिया: राहत और सवाल दोनों
जहां बहुत से दर्शकों ने सोशल मीडिया पर इस फैसले को ‘सिनेमा प्रेमियों के लिए तोहफा’ बताया, वहीं कुछ लोगों ने पूछा कि अगर सरकार सिनेमा टिकट की कीमत तय कर सकती है, तो स्कूल फीस पर क्यों नहीं नियंत्रण कर सकती? यह बहस राज्य में सार्वजनिक हित बनाम व्यवसायिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर केंद्रित होती जा रही है।
अन्य राज्यों की स्थिति और कानूनी राह
तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी टिकट दरों पर सीमाएं लागू हैं। कर्नाटक में इससे पहले भी ऐसी सीमा लागू की गई थी, लेकिन अदालत में इसे आंशिक रूप से रद्द कर दिया गया था। इस बार सरकार ने प्रीमियम सीटों को भी छूट नहीं दी है, जिससे कानूनी चुनौती की संभावना बनी हुई है।
सिनेमा जनता के करीब या उद्योग के विरुद्ध?
Karnataka सरकार का यह कदम जहां एक ओर दर्शकों के लिए राहत है, वहीं दूसरी ओर मल्टीप्लेक्स उद्योग के लिए चिंता का विषय बन गया है। मसौदा अधिसूचना पर जनता की प्रतिक्रिया के बाद यह तय होगा कि यह नीति कितनी व्यवहारिक और टिकाऊ होगी। फिलहाल इतना तय है कि यह फैसला राज्य में सिनेमा को लेकर नई बहस को जन्म दे चुका है।