NHRC Directions for Sleeper Buses: भारतीय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्लीपर बसों को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए सभी राज्यों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने राज्यों के मुख्य सचिवों से कहा है कि जो भी स्लीपर कोच बसें सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करतीं, उन्हें तुरंत सड़क से हटा दिया जाए। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि बीते महीनों में स्लीपर बसों के हादसे लगातार बढ़े हैं और कई लोगों की जान भी गई है।
बढ़ते हादसे और जीवन के अधिकार का उल्लंघन
भारत में स्लीपर बसों का इस्तेमाल ज्यादातर रात के लंबी दूरी के सफर के लिए किया जाता है। लेकिन ओवरलोडिंग, खराब मेंटेनेंस, तेज रफ्तार और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण ये बसें हादसों की मुख्य वजह बन रही हैं। कई हादसों में लोगों की मौत होना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का सीधा उल्लंघन माना गया है। इसी वजह से NHRC ने स्लीपर बसों पर कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है।
पहले भी जारी हुए थे कई सुरक्षा निर्देश
आयोग ने वर्ष 2024-25 में सड़कों पर चलने वाली बसों की सुरक्षा के लिए कई नियम जारी किए थे। इनमें स्लीपर बसों में सीट बेल्ट और CCTV कैमरे लगाना, ड्राइवरों की सही ट्रेनिंग, ओवरलोडिंग पर सख्त निगरानी और बसों की नियमित जांच शामिल है। लेकिन इन नियमों का पालन कई जगहों पर नहीं हो रहा है। वर्ष 2025 में अब तक स्लीपर बस हादसों में 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा 2024 में लागू किए गए AIS-118 सेफ्टी स्टैंडर्ड का भी सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है।
हाल के हादसे और राज्यों की जिम्मेदारी
5 नवंबर 2025 को तेलंगाना के हैदराबाद के चेवेल्ला क्षेत्र में एक स्लीपर बस पलट गई थी, जिसमें 19 लोगों की जान चली गई। इस मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया और NHAI, RTC, पुलिस सहित छह विभागों से सिस्टम फेलियर पर रिपोर्ट मांगी। बस रूट पर सुरक्षा जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। 28 अक्टूबर 2025 को राजस्थान के जयपुर जिले के मनोहरपुर में एक स्लीपर बस में आग लग गई थी, जिसमें 8 लोगों की मौत हुई। जांच में पाया गया कि बस में सुरक्षा के मानक पूरे नहीं किए गए थे। राज्य आयोग ने परिवहन विभाग, पुलिस और जिला अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। साथ ही खराब या कंडम बसों को तुरंत जब्त करने, फायर सेफ्टी की जांच और रूट परमिशन की जांच का आदेश दिया गया।
NHRC का स्पष्ट संदेश
आयोग ने कहा है कि यदि स्लीपर बसें सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करेंगी, तो उन्हें सड़क पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसका उद्देश्य यात्रियों की जान की सुरक्षा और सड़क हादसों को कम करना है।



