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10 मिनट की ‘मौत की रेस’ पर लगा ब्रेक, मोदी सरकार ने क्विक कॉमर्स दिग्गजों को झुकाया।

केंद्र सरकार के कड़े रुख के बाद प्रमुख क्विक कॉमर्स कंपनियों ने '10 मिनट डिलीवरी' के वादे को वापस ले लिया है। यह फैसला 31 दिसंबर 2025 की देशव्यापी हड़ताल और नए 'सोशल सिक्योरिटी कोड' के तहत श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

Mayank Yadav by Mayank Yadav
January 13, 2026
in Latest News, उत्तर प्रदेश, क्राइम
Gig worker
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Gig worker safety 10-minute delivery ban: भारत के विशाल गिग वर्कफोर्स की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, केंद्र सरकार ने क्विक कॉमर्स क्षेत्र की जोखिम भरी व्यापारिक नीतियों में निर्णायक हस्तक्षेप किया है। श्रमिक संघों के बढ़ते दबाव और नियामक चिंताओं के बीच, ब्लिंकिट (Blinkit), ज़ेप्टो (Zepto) और स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) जैसे दिग्गजों ने अपने प्लेटफॉर्म से “10-minute delivery” के सभी संदर्भों को पूरी तरह हटाने पर सहमति जताई है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के साथ गहन विमर्श के बाद लिया गया यह निर्णय उन लाखों डिलीवरी पार्टनर्स की एक ऐतिहासिक जीत है, जिनका मानना था कि यह बेहद कम समय सीमा न केवल उनके जीवन को खतरे में डाल रही थी, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में शोषण का पर्याय बन चुकी थी।

मुख्य विवरण और बदलाव

1. सुरक्षा बनाम रफ्तार: एक बड़ा बदलाव

क्विक कॉमर्स सेक्टर की “इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन” की होड़ ने डिलीवरी राइडर्स को भारी तनाव में डाल दिया था। 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, समय के दबाव के कारण इन Gig worker राइडर्स की दुर्घटना दर सामान्य से 30% अधिक थी। सरकार ने अब स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता की सुविधा किसी की जान से बढ़कर नहीं हो सकती।

2. कानूनी सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा (Social Security)

मंत्रालय ने ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2020’ (जो नवंबर 2025 में अधिसूचित हुआ) का हवाला देते हुए कंपनियों को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

  • Gig worker डिलीवरी पार्टनर्स के लिए स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और पेंशन फंड में अनिवार्य योगदान।

  • “10 मिनट” के मार्केटिंग दावों को ‘भ्रामक विज्ञापन’ की श्रेणी में रखकर उन्हें हटाने का आदेश।

3. कंपनियों के नए संकल्प

इस हस्तक्षेप के बाद कंपनियों ने अपने मॉडल में मानवीय बदलाव किए हैं:

  • Zomato/Blinkit: बेस पे में 15% की बढ़ोतरी और सुरक्षित ड्राइविंग के लिए विशेष बोनस।

  • Swiggy & Zepto: डिलीवरी पार्टनर्स के लिए अनिवार्य विश्राम (Rest breaks) और बेहतर बीमा कवर।

4. श्रमिकों के लिए सकारात्मक परिणाम

  • सड़क सुरक्षा: अब राइडर्स बिना किसी दंडात्मक डर के यातायात नियमों का पालन कर सकेंगे।

  • बेहतर आय: प्रभावी पारिश्रमिक संरचना से अब मासिक आय 30,000 से 40,000 रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।

  • मानसिक राहत: असंभव समय सीमा के हटने से काम के दबाव और मानसिक तनाव में भारी कमी आएगी।

यह ऐतिहासिक सुधार भारत की उभरती अर्थव्यवस्था और श्रमिक अधिकारों के बीच एक आवश्यक संतुलन बनाता है। विशेषज्ञ इसे मानवाधिकारों की जीत मान रहे हैं, जो भविष्य में अन्य गिग सेक्टरों के लिए भी एक मानक (Benchmark) स्थापित करेगा।

क्विक कॉमर्स डिलीवरी नियम: पुराना बनाम नया (2026)

विशेषता

पुराने नियम (जनवरी 2026 से पहले)

नए नियम (हस्तक्षेप के बाद)

डिलीवरी का समय

10 मिनट के भीतर का वादा

रफ्तार के बजाय ‘भरोसे’ पर ध्यान

श्रमिकों पर दबाव

बहुत अधिक; देरी होने पर जुर्माना

कम; सुरक्षा कारणों से देरी पर कोई जुर्माना नहीं

सामाजिक सुरक्षा

नगण्य या बहुत कम

अनिवार्य स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा

मार्केटिंग दावे

“10-minute delivery” के बड़े बैनर

अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी दावों को हटाना

इंसेंटिव (प्रोत्साहन)

रफ्तार और डिलीवरी संख्या पर आधारित

सेफ्टी बोनस और उच्च आधार वेतन (Base Pay)

विश्राम की अवधि

अक्सर अनदेखी की जाती थी

अनिवार्य विश्राम अंतराल (Rest Breaks) लागू

किस्त पर खुशियां: नोएडा के ‘रईस’ युवा, जेब में छेद और सिर पर 14 करोड़ का कर्ज!

Tags: Gig worker
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Mayank Yadav

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