Noida Authority News: नोएडा सेक्टर-150 में बेसमेंट डूबने से हुई एक दुखद मृत्यु और पूर्व में हुए ‘कैलेंडर विवाद’ के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लोकेश एम को पद से हटा दिया है। इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब गौतमबुद्ध नगर के गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या सरकार नोएडा में एक बार फिर पुराने प्रशासनिक Noida Authority मॉडल को बहाल करने जा रही है। सूत्रों की मानें तो शासन स्तर पर इस बात पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है कि नोएडा सीईओ और चेयरमैन का पद एक ही अधिकारी को सौंप दिया जाए। माना जाता है कि पदों के एकीकरण से न केवल नौकरशाही का हस्तक्षेप कम होता है, बल्कि बड़े प्रोजेक्ट्स पर निर्णय लेने की गति भी दोगुनी हो जाती है।
प्रशासनिक शिथिलता बनी हटाने की वजह
लोकेश एम के कार्यकाल के दौरान कई विजनरी योजनाओं की बात तो हुई, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट रही। विश्लेषण के अनुसार, उनके समय में बोर्ड बैठकों के महज 50 प्रतिशत एजेंडे ही पास हो सके। इसके अलावा, विकास कार्यों के लिए आवंटित बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हो पाया, जिससे शहर के बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स पिछड़ गए। स्टाफ पर प्रशासनिक पकड़ ढीली होने के कारण महत्वपूर्ण फाइलें दफ्तरों में ही अटकी रहीं, जिसका खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ा।
एकीकृत पद और विकास का इतिहास
पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो नोएडा में सबसे बड़े और ऐतिहासिक विकास कार्य उसी दौर में हुए जब सीईओ और चेयरमैन की कमान एक ही हाथ में थी।
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प्रमुख उपलब्धियां: चिल्ला और भंगेल एलिवेटेड रोड, मेट्रो विस्तार, और नोएडा इंटरनेशनल गोल्फ कोर्स जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स उसी समय धरातल पर उतरे।
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जटिल समाधान: बिल्डर-बायर विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी उसी दौरान निर्णायक फैसले लिए गए थे।
क्या होगा लाभ?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब चेयरमैन शासन स्तर का एक वरिष्ठ अधिकारी होता है और वही सीईओ की भूमिका निभाता है, तो स्थानीय स्तर के स्टाफ पर अनुशासन का दबाव रहता है। इससे बोर्ड बैठकों में रुटीन समस्याओं का तुरंत निस्तारण होता है और शासन से तालमेल बिठाने में समय की बर्बादी नहीं होती।
फिलहाल, नए नाम की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन संभावना यही है कि किसी कद्दावर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को यह दोहरी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है ताकि Noida Authority के विकास को फिर से पटरी पर लाया जा सके।









