UP Free School RTE Admission 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों में मुफ्त प्रवेश प्रक्रिया की घोषणा कर दी है। इस बार विभाग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिसमें अभिभावकों का आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। प्रदेश के लगभग 68,000 निजी स्कूलों में 6.80 लाख सीटें गरीब बच्चों के लिए उपलब्ध होंगी। पूरी UP Free School प्रवेश प्रक्रिया को तीन चरणों में विभाजित किया गया है, जिसकी शुरुआत 2 फरवरी से होगी। शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि इस डिजिटल पहल के माध्यम से न केवल प्रवेश पारदर्शी हो, बल्कि किताबों और वर्दी के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता भी सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खातों में भेजी जा सके।
तीन चरणों में पूरी होगी प्रवेश प्रक्रिया
शिक्षा विभाग ने इस बार आवेदनों के बोझ को व्यवस्थित करने और समय पर सत्र शुरू करने के लिए तीन-चरणीय कैलेंडर जारी किया है:
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प्रथम चरण: आवेदन 2 फरवरी से 16 फरवरी तक लिए जाएंगे। इसकी लॉटरी 18 फरवरी को निकलेगी और 20 फरवरी तक नामांकन के आदेश जारी होंगे।
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द्वितीय चरण: जो अभिभावक पहले चरण में चूक जाएंगे, वे 21 फरवरी से 7 मार्च तक आवेदन कर सकेंगे। 9 मार्च को लॉटरी के बाद 11 मार्च तक स्कूल आवंटन होगा।
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तृतीय चरण: अंतिम अवसर के रूप में 12 मार्च से 25 मार्च तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसकी लॉटरी 27 मार्च को निकाली जाएगी।
सभी चयनित बच्चों का प्रवेश 11 अप्रैल तक सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
आधार कार्ड और वित्तीय सहायता में बदलाव
इस UP Free School सत्र का सबसे बड़ा बदलाव आधार कार्ड की अनिवार्यता है। अब बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता का आधार भी सत्यापन के लिए आवश्यक होगा। इसका मुख्य उद्देश्य फर्जीवाड़े को रोकना और डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से वित्तीय लाभ पहुंचाना है। पाठ्यपुस्तकों, कॉपियों और अन्य शैक्षिक सामग्रियों के लिए मिलने वाली सरकारी सहायता अब सीधे अभिभावकों के आधार से जुड़े खातों में जमा की जाएगी।
सीटों का गणित और प्रशासनिक तैयारी
महानिदेशक स्कूल शिक्षा, मोनिका रानी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी निजी स्कूलों की 25% सीटों की मैपिंग और सर्वे समय रहते पूरा कर लिया जाए। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार आवेदनों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। पिछले साल लगभग 3.34 लाख आवेदन आए थे, जिनमें से 1.41 लाख बच्चों का ही प्रवेश हो पाया था। इस अंतर को कम करने के लिए इस वर्ष ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है और डीएम कार्यालय, बीएसए कार्यालय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हेल्प डेस्क बनाए गए हैं ताकि तकनीकी रूप से अक्षम अभिभावकों की सहायता की जा सके।


