Praveen Togadia News: प्रयागराज में संगम स्नान की परंपरा को लेकर उपजे हालिया विवाद ने देशभर के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस संवेदनशील मुद्दे पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने अपनी तीखी और भावुक प्रतिक्रिया दी है। तोगड़िया ने स्पष्ट किया कि संगम जैसे पावन स्थल पर परंपराओं का टकराव न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था को चोट पहुँचाने वाला है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “हिंदू बटेगा तो कटेगा” महज एक चुनावी नारा नहीं है, बल्कि इतिहास के पन्नों से निकली एक कड़वी सच्चाई है। तोगड़िया के अनुसार, जब-जब हिंदू समाज आंतरिक कलह में उलझा है, उसे भारी क्षति हुई है, इसलिए वर्तमान समय की मांग अटूट एकजुटता है।
परंपराओं का सम्मान और आपसी विवाद
भदोही में मीडिया से बात करते हुए डॉ. Praveen Togadia ने कहा कि ढाई हजार साल पुरानी आदि जगतगुरु शंकराचार्य की गौरवशाली परंपरा और गोरखपीठ की सनातन साधना, दोनों ही हिंदू धर्म के मजबूत स्तंभ हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन दोनों महान पीठों का उद्देश्य हमेशा समाज को जोड़ना रहा है, न कि उसे विभाजित करना।
तोगड़िया ने इस बात पर चिंता जताई कि श्रद्धालु इस विवाद के कारण तनाव में हैं। उन्होंने कहा, “किसी भी निजी व्यक्ति को शंकराचार्य या महंतों के बीच हस्तक्षेप करने या उन्हें सुझाव देने का अधिकार नहीं है, लेकिन एक हिंदू होने के नाते मेरा हृदय इस बिखराव को देखकर व्यथित है।”
योगी आदित्यनाथ और संतों से समाधान की उम्मीद
डॉ. Praveen Togadia ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अपना भरोसा जताते हुए कहा कि वह पूज्य महंत अवैद्यनाथ जी की महान परंपरा के उत्तराधिकारी हैं। उन्हें विश्वास है कि मुख्यमंत्री योगी और पूजनीय शंकराचार्य मिलकर इस संवेदनशील मुद्दे का कोई सम्मानजनक समाधान निकाल लेंगे।
एकता ही एकमात्र विकल्प
लेख के अंत में, Praveen Togadia ने हिंदू समाज से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज जब हिंदू समाज प्रगति की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में आंतरिक विवाद केवल हमारी शक्ति को कम करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी संप्रदायों और संतों का सम्मान बना रहना चाहिए ताकि हर श्रद्धालु बिना किसी भय या टकराव के संगम में आस्था की डुबकी लगा सके।
तोगड़िया का यह बयान ऐसे समय में आया है जब धर्म संसद और स्नान के अधिकारों को लेकर संतों के बीच मतभेद गहराते दिख रहे हैं, जिसे शांत करना अब हिंदू नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।


