Sambhal Violence Case:संभल हिंसा से जुड़े एक अहम मामले में अदालत के आदेश के बाद प्रशासनिक और न्यायिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में हिंसा में घायल युवक आलम के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) विभांशु सुधीर ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। इस फैसले के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में छा गया।
सीजेएम विभांशु सुधीर का तबादला, आदित्य सिंह को मिली जिम्मेदारी
सीजेएम विभांशु सुधीर के तबादले के बाद संभल के सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह को नया सीजेएम नियुक्त किया गया है। खास बात यह है कि आदित्य सिंह की अदालत में पहले से ही चर्चित हरिमंदिर–जामा मस्जिद से जुड़ा मामला चल रहा है। ऐसे में उनकी नई भूमिका को लेकर भी कानूनी जानकारों की नजर बनी हुई है।
FIR दर्ज करने का आदेश कैसे आया
संभल जिले के चंदौसी स्थित एक अदालत ने हिंसा से जुड़े मामले में तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और कुछ अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। यह आदेश 9 जनवरी को पारित किया गया। हालांकि, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया था कि प्रशासन इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देगा।
यह फैसला उस याचिका पर आया था, जो हिंसा में घायल युवक के पिता ने दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि पुलिस फायरिंग में उनका बेटा घायल हुआ है।
पिता ने लगाए गंभीर आरोप
नखासा थाना क्षेत्र के खग्गू सराय इलाके के रहने वाले यामीन ने अदालत को बताया कि उनका 24 वर्षीय बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को पापड़ बेचने के लिए घर से निकला था। इसी दौरान शाही जामा मस्जिद के पास पुलिसकर्मियों ने उसे गोली मार दी। शिकायत में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, थाना प्रभारी अनुज तोमर और 10 से 12 अज्ञात पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया।
सुनवाई के बाद अदालत ने सभी नामजद और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ता के वकील चौधरी अख्तर हुसैन साजेब ने बताया कि घायल युवक ने पुलिस से बचते हुए छिपकर इलाज कराया था। कोर्ट ने सभी तथ्यों को देखते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
यह पूरा विवाद 19 नवंबर को शुरू हुआ था। उस दिन वकील हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन समेत कुछ हिंदू याचिकाकर्ताओं ने संभल जिला अदालत में एक मुकदमा दायर किया था। याचिका में दावा किया गया था कि शाही जामा मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद हरिहर नाथ मंदिर के ऊपर किया गया है।
अदालत के आदेश पर उसी दिन एक सर्वे कराया गया था। इसके बाद 24 नवंबर को दूसरा सर्वेक्षण हुआ। इन्हीं घटनाओं के बीच माहौल तनावपूर्ण हो गया और हिंसा की स्थिति बनी।
आगे क्या होगा, सबकी नजरें अदालत पर
पुलिस के खिलाफ एफआईआर के आदेश, सीजेएम का तबादला और पहले से चल रहे धार्मिक स्थल विवाद ने संभल को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले में अदालतों के फैसले और प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी रहेगी।






