Return of India’s Cultural Heritage: अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में स्थित दुनिया के मशहूर स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट ने भारत की सांस्कृतिक धरोहर को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। म्यूजियम ने घोषणा की है कि वह तमिलनाडु के मंदिरों से अवैध रूप से निकाली गई तीन प्राचीन कांस्य मूर्तियों को भारत सरकार को वापस करेगा।
किस आधार पर हुआ फैसला
यह फैसला वर्षों तक चली जांच और ठोस ऐतिहासिक सबूतों के आधार पर लिया गया है। म्यूजियम की जांच में यह साफ हो गया कि ये तीनों मूर्तियां कई दशक पहले दक्षिण भारत के मंदिरों से चोरी की गई थीं और बाद में अंतरराष्ट्रीय कला बाजार के जरिए विदेश पहुंची थीं। इन मूर्तियों की असली पहचान और उनके मूल मंदिरों की पुष्टि फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ पांडिचेरी के पुराने फोटो रिकॉर्ड से की गई, जिसमें 1950 के दशक में मंदिरों में ली गई तस्वीरें मौजूद थीं।
वापस की जा रही तीनों मूर्तियां दक्षिण भारतीय कांस्य कला की बेहतरीन मिसाल हैं।
कौन-कौन सी मूर्तियां होगी वापस
इनमें सबसे प्रमुख चोल काल की शिव नटराज मूर्ति है, जो करीब 990 ईस्वी की मानी जाती है। यह मूर्ति तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्थित तिरुथुराईपुंडी के श्री भव औषधीश्वर मंदिर से चोरी की गई थी।
दूसरी मूर्ति सोमस्कंद की है, जो 12वीं शताब्दी के चोल काल की है और मन्नारगुड़ी के पास अलत्तूर स्थित विश्वनाथ मंदिर से गायब हुई थी।
तीसरी मूर्ति संत सुंदरर और परवई की है, जो 16वीं शताब्दी के विजयनगर काल से जुड़ी है और कल्लाकुरिची जिले के वीरसोलापुरम शिव मंदिर से चोरी हुई थी।
मूर्तियां कैसे पहुंची थी म्यूजियम तक
जांच में यह भी सामने आया कि शिव नटराज की मूर्ति को साल 2002 में न्यूयॉर्क की एक आर्ट गैलरी से खरीदा गया था। उस समय बिक्री के लिए फर्जी दस्तावेज दिखाए गए थे। वहीं बाकी दो मूर्तियां 1987 में म्यूजियम को उपहार के रूप में दी गई थीं। बाद में जब इनकी तुलना पुराने फोटो रिकॉर्ड से की गई, तो यह साबित हो गया कि ये मूर्तियां अवैध तरीके से मंदिरों से हटाई गई थीं।
हुआ खास समझौता
भारत सरकार और स्मिथसोनियन म्यूजियम के बीच इस मुद्दे पर एक खास समझौता भी हुआ है। इसके तहत शिव नटराज की मूर्ति को पहले आधिकारिक रूप से भारत को सौंपा जाएगा, इसके बाद भारत सरकार इसे लंबी अवधि के लिए लोन पर म्यूजियम को वापस देगी। म्यूजियम अब इस मूर्ति को अपनी प्रदर्शनी “द आर्ट ऑफ नॉइंग” में रख सकेगा, लेकिन इस बार इसके साथ मूर्ति की चोरी और भारत वापसी की पूरी सच्ची कहानी भी दर्शाई जाएगी।
म्यूजियम के निदेशक का बयान
म्यूजियम के निदेशक चेस रॉबिन्सन ने कहा कि यह फैसला सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनकी जिम्मेदारी और ईमानदारी को दिखाता है। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और भारत सरकार के सहयोग के लिए आभार जताया।

