Aviation Safety Under Scanner: एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक निजी विमानन कंपनी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसी European Union Aviation Safety Agency यानी EASA ने करीब एक साल पहले ही इस कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद भारत में कंपनी की उड़ानें कैसे चलती रहीं, इस पर अब लगातार सवाल पूछे जा रहे हैं।
यह मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि हाल ही में इसी कंपनी का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें अजीत पवार सहित कई लोगों की जान चली गई।
EASA ने बताई सबसे गंभीर सुरक्षा खामी
EASA की रिपोर्ट के अनुसार, VSR वेंचर्स को ‘लेवल-1’ सुरक्षा श्रेणी में रखा गया था। विमानन नियमों में लेवल-1 का मतलब होता है कि कंपनी यात्रियों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह नाकाम रही है या फिर जांच एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं कर रही है। यह सुरक्षा खामी की सबसे गंभीर श्रेणी मानी जाती है।
इसी कारण EASA ने कंपनी का थर्ड कंट्री ऑपरेटर (TCO) लाइसेंस सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद यूरोपीय हवाई क्षेत्र में इस कंपनी की उड़ानों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई।
2023 की दुर्घटना की जानकारी छुपाने का आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सितंबर 2023 में मुंबई में कंपनी के एक लियरजेट-45 विमान के साथ हादसा हुआ था। इस दुर्घटना से जुड़ी तकनीकी जानकारी EASA ने कई बार मांगी, लेकिन कंपनी ने कोई ठोस विवरण साझा नहीं किया।
अक्टूबर 2023 से नवंबर 2024 के बीच EASA ने कंपनी को कुल पांच नोटिस भेजे। इसके बावजूद कंपनी ने न तो आंतरिक जांच रिपोर्ट दी और न ही जरूरी तकनीकी दस्तावेज साझा किए। इसी रवैये के चलते EASA ने कंपनी पर सख्त कार्रवाई की।
भारत में उड़ानों की अनुमति पर सवाल
EASA द्वारा यूरोप में प्रतिबंध लगाए जाने के बाद यह जानकारी यूरोपीय यूनियन की ओर से भारत के नागरिक विमानन महानिदेशालय Directorate General of Civil Aviation यानी DGCA को भी भेजी गई थी। इसके बावजूद सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘असुरक्षित’ घोषित की जा चुकी कंपनी को भारत में उड़ानों और यहां तक कि वीआईपी यात्राओं की अनुमति कैसे दी गई।
इस पूरे मामले पर DGCA की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे संदेह और गहरा गया है।
हादसे के बाद CID जांच और ब्लैक बॉक्स जब्त
पिछले हफ्ते बारामती के पास जो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, वह भी इसी कंपनी का था। इस दर्दनाक हादसे में अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने जांच की जिम्मेदारी Crime Investigation Department यानी CID को सौंप दी है।
वहीं, Aircraft Accident Investigation Bureau ने विमान का ब्लैक बॉक्स जब्त कर लिया है। माना जा रहा है कि ब्लैक बॉक्स के डेटा से हादसे की असली वजह सामने आ सकेगी और यह भी साफ होगा कि कहीं सुरक्षा में लापरवाही तो नहीं हुई।
पूरे सिस्टम पर उठते सवाल
यह मामला सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। अगर किसी कंपनी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैन है, तो उसे भारत में उड़ान की इजाजत कैसे मिलती है, यह जांच का बड़ा विषय बन चुका है।







