Shocking Truth of Missing People in the State: सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार पिछले दो वर्षों में राज्य से एक लाख से अधिक लोग लापता हो चुके हैं, लेकिन इनमें से केवल करीब दस हजार लोगों का ही अब तक पता चल पाया है। यह आंकड़े न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए अदालत ने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए अब जनहित याचिका के रूप में सुनवाई करने का फैसला किया है।
कैसे सामने आई यह गंभीर सच्चाई
यह मामला तब सामने आया जब लखनऊ के चिनहट इलाके के रहने वाले विक्रमा प्रसाद ने अदालत में याचिका दाखिल की। उन्होंने बताया कि उनका बेटा जुलाई 2024 से लापता है। उन्होंने चिनहट थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने उसे ढूंढने में कोई खास रुचि नहीं दिखाई। महीनों बीत जाने के बाद भी जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो मजबूर होकर पिता को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने राज्य के अपर मुख्य सचिव (गृह) को आदेश दिया कि वे पूरे प्रदेश में लापता व्यक्तियों से जुड़े आंकड़े हलफनामे के रूप में पेश करें।
सरकारी हलफनामे ने बढ़ाई चिंता
अपर मुख्य सचिव द्वारा दिए गए हलफनामे ने सभी को हैरान कर दिया। आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच करीब 1 लाख 8 हजार 300 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे समय में पुलिस केवल लगभग 9 हजार 700 लोगों को ही ढूंढ पाई है। बाकी लोग अब भी लापता हैं और उनके परिवार अनिश्चितता और डर के साये में जी रहे हैं।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और आगे की राह
इन आंकड़ों को देखने के बाद कोर्ट ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों के रवैये को टालमटोल वाला बताया। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोग गायब हो रहे हैं और उन्हें खोजने में पुलिस की सफलता बेहद कम है। इससे साफ होता है कि आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सिस्टम गंभीर नहीं है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अब इस मामले को किसी एक व्यक्ति की शिकायत मानकर नहीं देखा जाएगा। इसे पूरे प्रदेश में लापता लोगों से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा मानते हुए जनहित याचिका के रूप में सुना जाएगा। अदालत ने संकेत दिए हैं कि आने वाली सुनवाइयों में जवाबदेही तय की जा सकती है और सख्त निर्देश भी जारी हो सकते हैं।
