Brother Job Fraud Case: यह मामला सिर्फ सरकारी नौकरी में धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि भरोसे, रिश्तों और सिस्टम की खामियों का भी है। यहां एक युवक ने अपने ही मृत भाई के नाम से लेखपाल की नौकरी हासिल कर ली और कई सालों तक बिना पकड़े गए काम करता रहा। यह चौंकाने वाला मामला Mainpuri जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला हंसनगर से जुड़ा हुआ है।
मौत के बाद शुरू हुआ फर्जीवाड़ा
आरोपों के अनुसार, हंसनगर निवासी अखिलेश कुमार के भाई अनिल कुमार ने 11 फरवरी 2016 की रात जहरीला पदार्थ खा लिया था। हालत बिगड़ने पर उसे Saifai PGI में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अगले दिन 12 फरवरी 2016 को Etawah में पोस्टमार्टम हुआ। अनिल कुमार अपनी मौत से पहले लेखपाल की परीक्षा पास कर चुका था। उसकी मौत के कुछ समय बाद जब घर पर नियुक्ति पत्र पहुंचा, तभी इस पूरे फर्जी खेल की शुरुआत हुई।
नाम बदला, कागज़ बदले, पहचान बदल गई
आरोप है कि अखिलेश कुमार ने सुनियोजित तरीके से अपने आधार कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में मृत भाई अनिल कुमार का नाम दर्ज करा लिया। इसके बाद 1 जून 2016 को उसने अनिल कुमार के नाम से लेखपाल पद पर जॉइनिंग कर ली। फिलहाल वह तहसील करहल, जिला Mainpuri में उसी नाम से तैनात बताया जा रहा है। इस पूरे मामले में उसकी मां अंगूरी देवी की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
पत्नी ने उठाई आवाज, घर में मच गया बवाल
इस फर्जीवाड़े का विरोध सबसे पहले घर के अंदर से ही हुआ। अखिलेश की पत्नी सुबीना देवी ने जब इस नौकरी को लेकर सवाल उठाए, तो मामला बिगड़ गया। आरोप है कि उसे चुप कराने के लिए गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकियां दी गईं। सुबीना देवी का कहना है कि अखिलेश ने साफ कहा था कि अगर उसकी नौकरी गई, तो वह उसे, उसके पिता और भाइयों को जिंदा नहीं छोड़ेगा।
मारपीट, कैद और जान का खतरा
सुबीना देवी ने आरोप लगाया कि 28 अप्रैल 2024 की रात अखिलेश और उसकी मां ने मिलकर उसे बुरी तरह पीटा। इसके बाद उसे दो दिनों तक घर में बंद रखा गया और बाहर से ताला लगा दिया गया। बिना खाना और पानी के वह तड़पती रही। किसी तरह जान बचाकर वह Farrukhabad जिले के जहानगंज थाना क्षेत्र में अपने मायके पहुंच सकी।
डीएम से शिकायत, सख्त कार्रवाई की मांग
अब सुबीना देवी ने जिलाधिकारी Mainpuri को पूरे मामले की लिखित शिकायत दी है। उसने मृत व्यक्ति के नाम पर नौकरी कर रहे लेखपाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, नौकरी खत्म करने और कानूनी केस दर्ज करने की मांग की है। यह मामला प्रशासन और सिस्टम की जांच पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।






