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Supreme Court: सिर्फ पूछताछ के लिए गिरफ्तारी नहीं, सात साल तक सजा वाले मामलों में विशेष सावधानी बरते

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल पूछताछ के लिए किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। सात साल तक सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी अपवाद है, पुलिस को जरूरत और कानून के अनुसार ही कदम उठाना होगा।

SYED BUSHRA by SYED BUSHRA
February 6, 2026
in दिल्ली
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Supreme Court’s Key Observation: नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति को सिर्फ पूछताछ के लिए गिरफ्तार करना सही नहीं है। अदालत ने साफ किया कि गिरफ्तारी पुलिस का अधिकार जरूर है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है। इसका इस्तेमाल सोच-समझकर और कानून के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

बीएनएसएस कानून की व्याख्या

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत गिरफ्तारी की शक्ति को सख्ती से समझना होगा। इसे पुलिस की सुविधा के तौर पर नहीं, बल्कि एक जरूरी कानूनी जरूरत के रूप में ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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पूछताछ के नाम पर गिरफ्तारी

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ पूछताछ के लिए किसी व्यक्ति को हिरासत में लेना सही नहीं है। पुलिस को पहले यह देखना होगा कि क्या बिना गिरफ्तारी के जांच आगे बढ़ सकती है या नहीं। अगर जांच बिना हिरासत के भी संभव है, तो गिरफ्तारी जरूरी नहीं है।

सात साल तक सजा मामले

अदालत ने बताया कि जिन मामलों में अधिकतम सात साल तक की सजा है, उनमें गिरफ्तारी एक सामान्य प्रक्रिया नहीं बल्कि अपवाद है। पुलिस को तभी गिरफ्तारी करनी चाहिए, जब यह साबित हो कि बिना हिरासत के जांच प्रभावी ढंग से नहीं हो सकती।

नोटिस जारी करना जरूरी

सुप्रीम कोर्ट यह भी देख रहा था कि क्या ऐसे सभी मामलों में नोटिस देना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करना जरूरी प्रक्रिया है और गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होना चाहिए।

पुलिस को बरतनी होगी सावधानी

कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी करते समय सतर्क और संयमित रहना चाहिए। गिरफ्तारी से पहले जरूरी शर्तों का होना और उसका रिकॉर्ड रखना भी आवश्यक है। अगर गिरफ्तारी जरूरी न हो, तो जांच बिना गिरफ्तारी के भी जारी रखी जा सकती है।

लिखित कारण दर्ज करना जरूरी

अदालत ने कहा कि अगर पुलिस गिरफ्तारी नहीं करती, तो उसे इसके कारण लिखित रूप में दर्ज करने होंगे। हालांकि, बाद में जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी का अधिकार पुलिस के पास हमेशा रहेगा।

Tags: : Supreme Court IndiaArrest Rules India
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