AI Impact Summit 2026: को भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा था। इस मंच के जरिए देश ने दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश की कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसे “इंडिया का एआई मोमेंट” भी कहा जा रहा था। लेकिन इसी समिट में एक ऐसी घटना हो गई, जिसने पूरे आयोजन पर सवाल खड़े कर दिए।
क्या था पूरा मामला
ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University ने समिट में एक रोबोटिक डॉग पेश किया। यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने मंच से दावा किया कि इस रोबोट का नाम “ओरियन” है और इसे यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह रोबोट कैंपस में निगरानी और मॉनिटरिंग का काम करता है।
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। टेक्नोलॉजी से जुड़े लोगों ने तुरंत पहचान लिया कि यह रोबोट असल में चीनी कंपनी Unitree Robotics का मॉडल है। बताया गया कि यह यूनिट्री का Go2 मॉडल है, जो ऑनलाइन बाजार में लगभग 2 से 3 लाख रुपये में उपलब्ध है।
वीडियो से बढ़ा विवाद
प्रोफेसर नेहा सिंह का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें वह कहती नजर आईं कि यूनिवर्सिटी ने कभी कुछ डिजाइन या बनाने का दावा नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि “डेवलपमेंट” का मतलब जरूरी नहीं कि खुद बनाना ही हो। इस बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया।
सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे भारत की छवि से जुड़ा मामला बताया। कई लोगों ने सवाल उठाया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह की जानकारी देना देश की साख को नुकसान पहुंचा सकता है।
यूनिवर्सिटी की कार्रवाई
विवाद बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर नेहा सिंह को उनके पद से हटा दिया। वह कम्युनिकेशंस विभाग की हेड थीं। हालांकि, उनके इस्तीफे या हटाए जाने को लेकर यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सूत्रों के मुताबिक, मामला गंभीर होने पर सरकार ने समिट स्थल से यूनिवर्सिटी का पवेलियन भी हटवा दिया।
सवालों के घेरे में संस्थान
इस घटना ने शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एआई जैसे संवेदनशील और प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में गलत जानकारी देना बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा सकता है।
भारत इस समय एआई सेक्टर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही या गलत दावा देश की छवि पर असर डाल सकता है।



