ESMA and Essential Commodities Act: सरकार ने हालात को देखते हुए रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को खास निर्देश जारी किए हैं। इन कंपनियों से कहा गया है कि वे एलपीजी यानी तरलीकृत पेट्रोलियम गैस का उत्पादन ज्यादा से ज्यादा बढ़ाएं। इसके साथ ही कंपनियों को यह भी कहा गया है कि अपनी हाइड्रोकार्बन उत्पादन इकाइयों का कुछ हिस्सा एलपीजी बनाने की दिशा में लगा दें। सरकार का उद्देश्य यह है कि देश में गैस की कमी न हो और लोगों को जरूरी सेवाएं लगातार मिलती रहें।
आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू
सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को भी लागू कर दिया है। इस कानून के जरिए सरकार जरूरी वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण पर नियंत्रण रख सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरी सामान लोगों को सही दाम पर मिलता रहे और कोई भी व्यक्ति जमाखोरी या कालाबाजारी करके फायदा न उठा सके।
क्या है एस्मा कानून
आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम यानी ESMA एक ऐसा कानून है जिसे भारत की संसद ने वर्ष 1968 में पारित किया था। यह कानून संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची के अंतर्गत आता है।
इस कानून का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश में जरूरी सेवाएं बिना रुकावट के चलती रहें। अगर इन सेवाओं में बाधा आती है तो आम लोगों का जीवन काफी प्रभावित हो सकता है।
किन सेवाओं पर लागू होता है ESMA
कानून कई महत्वपूर्ण सेवाओं पर लागू होता है। इसमें सार्वजनिक परिवहन जैसे बस सेवाएं, अस्पताल, डॉक्टर और नर्स जैसी स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा स्वच्छता व्यवस्था, जल आपूर्ति, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सेवाएं भी इसके दायरे में आती हैं।
पेट्रोलियम, कोयला, बिजली, इस्पात और उर्वरक के उत्पादन या वितरण से जुड़ी संस्थाएं भी आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में मानी जाती हैं। बैंकिंग सेवाएं, संचार सेवाएं और खाद्यान्नों की खरीद व वितरण से जुड़ी सरकारी योजनाएं भी इसमें शामिल हो सकती हैं।
राज्य सरकारें भी लागू कर सकती हैं
जरूरत पड़ने पर राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर ESMA लागू कर सकती हैं। हर राज्य का अपना अलग आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम होता है, हालांकि उसके प्रावधान केंद्रीय कानून से काफी हद तक मिलते-जुलते होते हैं। अगर किसी हड़ताल या आंदोलन से केवल एक राज्य प्रभावित हो रहा हो तो राज्य सरकार इस कानून का सहारा ले सकती है। वहीं अगर समस्या राष्ट्रीय स्तर की हो, जैसे रेलवे सेवाओं में बाधा, तो केंद्र सरकार ESMA लागू कर सकती है।
नियम तोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई
अगर ESMA लागू होने के बाद कोई कर्मचारी हड़ताल करता है या दूसरों को इसके लिए उकसाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में नौकरी से निकालने तक की कार्रवाई संभव है। इसके अलावा पुलिस बिना वारंट के भी हड़ताल करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है।
इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती है।
कितने समय के लिए लागू होता है
पर ESMA को अधिकतम छह महीने के लिए लागू किया जा सकता है। इस अवधि के दौरान किसी भी कर्मचारी का हड़ताल पर जाना अवैध माना जाता है।
सरकार इस कानून का इस्तेमाल तब करती है जब हड़ताल या आंदोलन से आम जनता को मिलने वाली जरूरी सेवाएं प्रभावित होने का खतरा होता है।
