Petrol Price Hike: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। हाल ही में तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में करीब ₹2 से ₹2.30 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि फिलहाल सामान्य पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ऐसे हालात में आम लोगों की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है, क्योंकि हर महीने पेट्रोल पर होने वाला खर्च घरेलू बजट पर सीधा असर डालता है।
बढ़ती कीमतों से बड़ी प्राथमिकता
आज के समय में कार खरीदते वक्त माइलेज सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर बन गया है। खासकर मध्यम वर्गीय परिवार ऐसी गाड़ियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो कम ईंधन में ज्यादा दूरी तय कर सकें। अच्छी माइलेज वाली कारें न सिर्फ मासिक खर्च कम करती हैं, बल्कि लंबे समय में भी बड़ी बचत का जरिया बनती हैं।यही कारण है कि अब लोग पारंपरिक विकल्पों के साथ-साथ हाइब्रिड कारों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
हाइब्रिड कारें बन रही हैं बेहतर विकल्प
महंगे पेट्रोल के दौर में हाइब्रिड तकनीक से लैस कारें सबसे ज्यादा राहत देने वाली साबित हो रही हैं। उदाहरण के तौर पर Toyota Urban Cruiser Hyryder और Maruti Grand Vitara लगभग 27.97 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देती हैं। इन कारों में पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर भी होती है, जिससे ईंधन की खपत कम हो जाती है।
शानदार माइलेज वाली कारें
अगर आपका बजट सीमित है, तब भी बाजार में कई ऐसे विकल्प मौजूद हैं जो शानदार माइलेज देते हैं। Maruti Celerio करीब 26 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देती है, जिससे यह किफायती सेगमेंट की सबसे लोकप्रिय कारों में शामिल है।इसके अलावा Maruti Swift लगभग 25.75 किलोमीटर प्रति लीटर और Maruti Dzire करीब 25.71 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है। ये दोनों कारें रोजाना इस्तेमाल के लिहाज से काफी भरोसेमंद मानी जाती हैं।
सही कार चुनना
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ईंधन कीमतों के इस दौर में वही कार ज्यादा फायदेमंद साबित होती है, जो कम खर्च में ज्यादा दूरी तय कर सके। खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए माइलेज अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि एक जरूरी जरूरत बन चुका है। ऐसे में कार खरीदते समय माइलेज को प्राथमिकता देना लंबे समय में आर्थिक रूप से समझदारी भरा फैसला साबित हो सकता है।
