Nishad community politics UP :उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब निषाद समाज एक मजबूत ताकत बनकर उभर रहा है। इस समाज में निषाद, कश्यप, केवट, माल्हा, बिंद और मांझी जैसी जातियां शामिल हैं। इनकी आबादी भले ही करीब 4 प्रतिशत हो, लेकिन चुनाव में इनका असर काफी बड़ा माना जाता है।
कई सीटों पर निर्णायक भूमिका
राज्य की करीब 80 विधानसभा सीटों पर निषाद मतदाताओं की संख्या एक लाख के आसपास बताई जाती है। वहीं, लगभग 165 सीटों पर यह समाज चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की ताकत रखता है। खासतौर पर पूर्वांचल के जिलों में इनकी पकड़ काफी मजबूत है।
पूर्वांचल में मजबूत पकड़
गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़, बलिया, मऊ, जौनपुर, सुल्तानपुर, फतेहपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही और प्रयागराज जैसे इलाकों में निषाद समाज की अच्छी मौजूदगी है। यहां यह समुदाय न सिर्फ स्थानीय चुनाव, बल्कि विधानसभा और लोकसभा के नतीजों को भी प्रभावित करता है।
सपा का नया दांव
इसी को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी ने रुक्मिणी देवी को बड़ी जिम्मेदारी दी है। उन्हें महिला विंग का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। यह फैसला निषाद समाज को अपनी ओर जोड़ने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
बुंदेलखंड और पूर्वांचल पर नजर
रुक्मिणी देवी बुंदेलखंड की रहने वाली हैं, इसलिए सपा इस फैसले के जरिए बुंदेलखंड और पूर्वांचल दोनों क्षेत्रों को साधने की कोशिश कर रही है। खासतौर पर बुंदेलखंड में, जहां 2022 के चुनाव में सपा कमजोर रही थी, वहां यह कदम पार्टी को फायदा दे सकता है।
महिला और ओबीसी वोटरों पर फोकस
पार्टी सूत्रों का मानना है कि इस फैसले से महिला मतदाताओं के साथ-साथ ओबीसी वर्ग में भी सकारात्मक संदेश गया है। सपा अब निषाद समाज के साथ अन्य पिछड़ी जातियों को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।
रिबू श्रीवास्तव को नई जिम्मेदारी
इससे पहले महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष रहीं रिबू श्रीवास्तव को अब वाराणसी कैंट का प्रभारी बनाया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले चुनाव में उन्हें वहां से टिकट भी मिल सकता है।
पुराने समीकरण फिर से मजबूत करने की कोशिश
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, मुलायम सिंह यादव के समय निषाद समाज सपा के साथ मजबूती से जुड़ा था। लेकिन बाद में यह वोटबैंक बीजेपी की ओर चला गया। अब अखिलेश यादव फिर से इस समाज को अपनी ओर लाने की कोशिश कर रहे हैं।
2027 चुनाव की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि निषाद समाज का समर्थन सपा के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है, खासकर पूर्वांचल में। पार्टी इस रणनीति के जरिए 2027 के चुनाव में मजबूत स्थिति बनाने की कोशिश कर रही है।



