Nepali Ban on Indian Vehicles: नेपाल के मधेश इलाके में इन दिनों हालात सामान्य नहीं हैं। भारत-नेपाल सीमा से लेकर गांव-घर तक लोगों में नाराजगी और चिंता का माहौल है। खासकर वे परिवार ज्यादा परेशान हैं, जिनके पास भारतीय नंबर प्लेट वाली गाड़ियां हैं। अब नए नियमों के कारण ये गाड़ियां उनके लिए मुसीबत बन गई हैं।
सरकार का नया नियम क्या है
नेपाल की नई सरकार, जिसका नेतृत्व बालेन्द्र शाह कर रहे हैं, ने भारतीय नंबर वाली गाड़ियों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। साथ ही, भारत से आने वाले लोगों के लिए भी साल में सिर्फ 30 दिन तक ही वाहन के साथ प्रवेश की अनुमति दी गई है। इस फैसले को लेकर सीमावर्ती इलाकों में काफी नाराजगी है।
दहेज में मिली गाड़ियां बनी समस्या
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ा है, जिन्हें भारत से दहेज में गाड़ियां मिली थीं। उदाहरण के तौर पर, गौर में रहने वाले एक परिवार को दो साल पहले भारत से बुलेट बाइक मिली थी। उस समय यह खुशी की बात थी, लेकिन अब वही बाइक उनके लिए परेशानी बन गई है। न तो वे इसे आसानी से चला पा रहे हैं और न ही बेचने का सही विकल्प मिल रहा है।
कई परिवारों की एक जैसी हालत
यह समस्या सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं है। मधेश इलाके में ऐसे कई परिवार हैं, जिनकी हालत एक जैसी है। भारत से मिले उपहार अब उनके लिए बोझ बनते जा रहे हैं। ऊपर से, 100 रुपये से ज्यादा की चीजों पर नेपाल में टैक्स देना पड़ रहा है, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
नेपाल में उठ रही विरोध की आवाज
इस फैसले के खिलाफ नेपाल में भी आवाज उठने लगी है। कोड़ेना के मेयर रूपेश कुमार ने सरकार को पत्र लिखकर इस फैसले पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के बीच सिर्फ सीमा नहीं, बल्कि गहरे सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते भी जुड़े हैं।
पुरानी परंपराओं पर असर
सीमावर्ती इलाकों में शादी-ब्याह, व्यापार और रोजमर्रा का आना-जाना हमेशा से आसान रहा है। खासकर शादी में भारतीय नंबर की गाड़ी देना एक आम परंपरा रही है। लेकिन अब नए नियमों से यह परंपरा भी प्रभावित हो रही है।
सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग
स्थानीय नेताओं और संगठनों ने नेपाल सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो दोनों देशों के रिश्तों और लोगों के बीच विश्वास पर असर पड़ेगा। साथ ही, सीमावर्ती इलाकों की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
भविष्य को लेकर चिंता
लोगों को डर है कि अगर ये नियम जारी रहे, तो भारत-नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे ‘बेटी-रोटी’ के रिश्तों में दूरी आ सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इस फैसले पर आगे क्या कदम उठाती है।

