Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में पारा 40 डिग्री के पार पहुँचते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवंश की सुरक्षा के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से बेजुबानों को बचाने के लिए प्रदेश के सभी गो-आश्रय स्थलों को ‘हाई-टेक’ सुविधाओं से लैस किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के प्रकोप को देखते हुए योगी सरकार ने गो-आश्रय स्थलों में पशुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि गर्मी के कारण एक भी पशु को नुकसान नहीं पहुँचना चाहिए। इसके लिए आश्रय स्थलों पर इंसानों जैसी सुविधाएं जैसे वॉटर मिस्टिंग सिस्टम, कूलर और पंखे लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
भीषण गर्मी से बचाव के ‘स्मार्ट’ इंतजाम
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिलाधिकारियों को गो-आश्रय स्थलों की निगरानी बढ़ाने को कहा गया है:
* कूलिंग सिस्टम: आजमगढ़, बागपत, सहारनपुर और हरदोई जैसे जिलों में वॉटर मिस्टिंग सिस्टम और फॉगर (Foggers) लगाए जा चुके हैं।
* पेयजल और छाया: पशुओं के लिए 24 घंटे स्वच्छ पेयजल और पर्याप्त छायादार शेड अनिवार्य कर दिए गए हैं। साथ ही, भविष्य की राहत के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण भी किया जा रहा है।
चारा संकट का स्थायी समाधान: हाइब्रिड नेपियर घास
सरकार केवल तात्कालिक राहत ही नहीं, बल्कि चारे की समस्या का स्थायी समाधान भी खोज रही है:
* अतिक्रमण मुक्त चारागाह: प्रदेश भर में चारागाह भूमि को माफियाओं और अवैध कब्जेदारों से मुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
* नेपियर घास की बुआई: खाली कराई गई भूमि पर हाइब्रिड नेपियर घास उगाने पर जोर दिया जा रहा है, जो कम पानी में तेजी से बढ़ती है और लंबे समय तक हरा चारा उपलब्ध कराती है।
जौनपुर और महराजगंज भूसा दान में आगे
भूसा दान अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए सरकार अनोखे प्रयास कर रही है:
* सम्मान पत्र: जौनपुर जिलाधिकारी द्वारा भूसा दान करने वालों को ‘पुण्य की एफडी’ (Fixed Deposit of Virtue) प्रमाण पत्र वितरित किए गए हैं, जो समाज में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
* अग्रणी जिले: भूसा दान में महराजगंज, जौनपुर, बलिया, वाराणसी और गोरखपुर समेत 10 जनपद सबसे आगे चल रहे हैं। सरकार ने अन्य जिलों से भी इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की है।
नियमित निरीक्षण के निर्देश
अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे नियमित रूप से गो-आश्रय स्थलों का दौरा करें। किसी भी प्रकार की लापरवाही या सुविधाओं में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।







