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Tea Import Rule : भारत में चाय आयात के नियम बदले, हर खेप की लैब जांच जरूरी, निर्यातकों की बढ़ी चिंता

भारत सरकार ने 1 मई से आयातित चाय की हर खेप की अनिवार्य लैब टेस्टिंग लागू करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत सैंपलिंग, जांच और रिपोर्ट के बाद ही चाय बाजार में आ सकेगी। इससे गुणवत्ता नियंत्रण मजबूत होगा, लेकिन नेपाल समेत निर्यातकों और आयातकों पर लागत व लॉजिस्टिक्स का दबाव बढ़ सकता है।

Sadaf Farooqui by Sadaf Farooqui
April 28, 2026
in देश
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Tea Import Rules: भारत सरकार ने चाय की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आयात नियमों को सख्त करने का फैसला लिया है। बढ़ते आयात और मिलावट की आशंकाओं के बीच अब 1 मई से देश में आने वाली सभी चाय खेपों की अनिवार्य लैब टेस्टिंग की जाएगी। इस कदम का सीधा असर नेपाल समेत अन्य चाय निर्यातक देशों पर पड़ने की संभावना है।

1 मई से लागू होगा नया नियम

Tea Board India द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 1 मई से भारत में आयात होने वाली हर चाय खेप की सैंपलिंग और परीक्षण अनिवार्य होगा। इसमें नेपाल से आने वाली चाय भी शामिल है। हालांकि इंस्टेंट टी और रेडी-टू-ड्रिंक चाय को इस नियम से छूट दी गई है। सरकार का उद्देश्य गुणवत्ता मानकों को मजबूत करना और मिलावट पर रोक लगाना है।

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हर खेप की होगी सैंपलिंग और जांच

नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत, अधिकारियों द्वारा कंटेनरों का चयन रैंडम तरीके से किया जाएगा। कंटेनर के पहुंचने के 24 घंटे के भीतर 500-500 ग्राम के दो सैंपल लिए जाएंगे। अगर बंदरगाह पर सैंपलिंग संभव नहीं होती है, तो गोदामों से नमूने लिए जाएंगे।

प्रयोगशालाओं को 14 दिनों के भीतर रिपोर्ट अपलोड करनी होगी, जिसमें खेप को ‘पास’ या ‘फेल’ घोषित किया जाएगा। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आयातित चाय को अलग गोदाम में रखना होगा और उसे बाजार में बेचने या पुनः निर्यात करने की अनुमति नहीं होगी।

आयातकों पर बढ़ेगा बोझ

नई व्यवस्था के तहत आयातकों को टी काउंसिल पोर्टल पर खेप से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होगी, जिसमें कंटेनर विवरण, आगमन की तारीख और गोदाम की जानकारी शामिल है। प्रत्येक सैंपल के लिए 11,120 रुपये का शुल्क और लागू GST देना होगा।

अगर कोई सैंपल फेल होता है, तो आयातक 15,000 रुपये अतिरिक्त शुल्क देकर दूसरी लैब में दोबारा परीक्षण करा सकते हैं। दूसरी बार भी फेल होने पर खेप को नष्ट करना होगा या मूल देश में वापस भेजना पड़ेगा।

नेपाल के निर्यात पर असर

नेपाल के लिए भारत चाय का एक प्रमुख बाजार है और यह देश की विदेशी मुद्रा आय का अहम स्रोत भी है। नए नियमों के चलते नेपाली निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि टेस्टिंग प्रक्रिया में लगने वाले समय के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और व्यापार में रुकावट आ सकती है।

 

Tags: Nepal Tea ExportTea Import Rules
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Sadaf Farooqui

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