Apprenticeship Scheme: भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है और वैश्विक स्तर पर कुशल कामगारों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने कई कौशल विकास योजनाएं शुरू की हैं। इन्हीं में एक महत्वपूर्ण योजना है National Apprenticeship Promotion Scheme (NAPS), जिसका मकसद युवाओं को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उद्योगों के लिए तैयार करना है।
2016 में शुरू हुई थी बड़ी उम्मीदों के साथ योजना
Ministry of Skill Development and Entrepreneurship ने वर्ष 2016 में इस योजना की शुरुआत की थी। सरकार का लक्ष्य था कि अधिक से अधिक युवा एप्रेंटिसशिप से जुड़ें और उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन मिल सके। फिलहाल योजना का दूसरा चरण चल रहा है, लेकिन इसके परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं दिख रहे।
MSME सेक्टर में भागीदारी बेहद कम
देश में करीब 7.5 करोड़ MSME इकाइयां हैं, लेकिन एप्रेंटिसशिप योजना के तहत केवल 1.9 लाख प्रतिष्ठानों ने ही पंजीकरण कराया है। इनमें भी सिर्फ 51 हजार प्रतिष्ठान ही वास्तव में प्रशिक्षु रख रहे हैं। यह आंकड़ा बताता है कि योजना अभी भी अपने संभावित दायरे से बहुत पीछे है।
मंत्रालय ने समीक्षा बैठक में जताई चिंता
हाल ही में मंत्रालय की समीक्षा बैठक में योजना की धीमी प्रगति पर चिंता जताई गई। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि वर्तमान में युवाओं को एप्रेंटिसशिप से जोड़ने की गति लगभग 15 प्रतिशत की Compound Annual Growth Rate (CAGR) से चल रही है।
इस रफ्तार से वर्ष 2032 तक केवल 13 लाख युवाओं को ही योजना से जोड़ा जा सकेगा, जबकि देश में युवाओं की संख्या लगभग 30 करोड़ है।
क्या हैं योजना की धीमी प्रगति के कारण?
समीक्षा के दौरान सामने आया कि MSME क्षेत्र में जागरूकता की कमी, प्रक्रिया में पारदर्शिता की दिक्कतें और प्रशिक्षुओं का कोर्स पूरा करने का कम प्रतिशत बड़ी चुनौतियां हैं। वर्तमान में एप्रेंटिसशिप पूरी करने की दर करीब 48 प्रतिशत है।
उद्योग जगत ने सरकार को दिया सुझाव
Federation of Indian Micro and Small & Medium Enterprises (FISME) के अध्यक्ष राकेश छाबड़ा का कहना है कि योजना में खामी नहीं है, बल्कि इसे लागू करने के तरीके में सुधार की जरूरत है। उनका मानना है कि उद्योगों और ITI संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय से योजना को गति मिल सकती है।
सोनीपत मॉडल बना उदाहरण
हरियाणा के Sonipat को एप्रेंटिसशिप का रोल मॉडल बताया जा रहा है, जहां उद्योगों और ITI संस्थानों के समन्वय से बेहतर परिणाम मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग जिलों की जरूरतों के हिसाब से ट्रेड और कोर्स तय किए जाएं, तो यह योजना ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है।








