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Nepal New PM: PM मोदी ने नेपाल के नवनियुक्त पीएम 'प्रचंड' को दी बधाई, कहा- भारत और नेपाल के बीच दोस्ती मजबूत करने के साथ करेंगे काम

Nepal New PM: PM मोदी ने नेपाल के नवनियुक्त पीएम ‘प्रचंड’ को दी बधाई, कहा- भारत और नेपाल के बीच दोस्ती मजबूत करने के साथ करेंगे काम

PM Modi congratulates Pushpa Kamal Dahal: नेपाल के नए प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ आज तीसरी बार नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। सीपीएन- माओवादी सेंटर के अध्यक्ष प्रचंड को राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बधाई दी है। पीएम मोदी ने कहा कि नेपाल का प्रधानमंत्री चुने जाने पर पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ को हार्दिक बधाई। भारत और नेपाल के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध हैं। हम इस दोस्ती को और मजबूत करने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे।

तीसरी बार नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे पुष्प कमल दहल

बता दें कि राष्ट्रपति भंडारी ने रविवार को संविधान के अनुचछेद 76 के अनुसार, सीपीएन-माओवादी सेंटर के अध्यक्ष की ओर से 169 सदस्यों के समर्थन के बाद 68 साल के प्रचंड को देश का नया प्रधान मंत्री नियुक्त किया। वहीं आज दोपहर पूर्व गुरिल्ला नेता शीतल निवास में एक आधिकारिक समारोह में राष्ट्रपति भंडारी से पद और गोपनियता की शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालेंगे। वहीं भारी बहुमत से प्रधानमंत्री नियुक्त होने के बावजूद प्रचंड को अब संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार 30 दिनों के भीतर निचले सदन से विश्वास मत जीतना होगा। प्रचंड का नेपाल का नया प्रधानमंत्री बनना भारत-नेपाल संबंधों के लिए एक अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है।

नेपाल का नया प्रधानमंत्री बनना भारत-नेपाल संबंधों के लिए अच्छा संकेत नहीं

तीसरी बार नेपाल के प्रधानमंत्री बनाए जाए रहे प्रचंड को चीन समर्थक के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने एक बार कहा था कि नेपाल में बदले हुए परिदृश्य के अधार पर 1950 की मैत्री संधि में संशोधन और कालापानी और सुस्ता सीमा विवादों को हल करने जैसे सभी बकाया मुद्दों को हल करने के बाद भारत के साथ एक नई समझ विकसीत करने की आवश्यकता है।

वहीं 1950 की भारत- नेपाल शांति और मित्रता संधि दोनों देशों के बीच विशेष संबंधों का अधार बनाती है। हाल के वर्षों में प्रचंड ने कहा है कि भारत और नेपाल को द्विपक्षीय सहयोग की पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए इतिहास द्वारा छोड़े गए मुद्दों को कूटनीतिक रूप से संबोधित करने की आवश्यकता है।

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