जादवपुर लोकसभा क्षेत्र के भांगड़ के सतुलिया क्षेत्र में हुई इस झड़प में आईएसएफ और टीएमसी के लगभग 10 कर्मचारी घायल हुए हैं। आईएसएफ और सीपीआईएम कार्यकर्ताओं ने टीएमसी को इस हमले का जिम्मेदार ठहराया है। बताया गया है कि अभी भी कई जिंदा बम मौके पर पड़े हुए हैं।
इसलिए बहस
जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात को टीएमसी कार्यकर्ता चुनाव प्रचार के बाद अपने घर लौट रहे थे, जिससे यह बवाल शुरू हुआ। इसी दौरान उन पर हमला हुआ है। कोलकाता के एक सरकारी अस्पताल में घायलों को भर्ती कराया गया। बाद में शुक्रवार को टीएमसी कर्मचारियों ने हमला किया। यह बहस यहीं नहीं रुकी। शनिवार को वोटिंग के दिन भी दोनों पक्षों में संघर्ष हुआ।
इस पद से कई महत्वपूर्ण नेता निकले हैं।
पश्चिम बंगाल की सबसे ऊंची लोकसभा सीट में से एक जादवपुर है। प्रमुख वामपंथी नेता, जैसे पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी और पूर्व गृह मंत्री इंद्रजीत गुप्त, इस सीट से सांसद रह चुके हैं। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी इसी सीट से अपना संसदीय करियर शुरू किया था। 1984 के आम चुनाव में दिग्गज वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी ने इस सीट से ममता को हराया था।
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टीएमसी की राह इस बार आसान नहीं है
तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट को कमजोर कर दिया, जो पहले वामपंथियों का सबसे मजबूत गढ़ था। अब बीजेपी यहां अपनी सत्ता कायम करने के लिए उत्सुक है। TMC ने इस सीट पर पिछले तीन लोकसभा चुनावों में जीत हासिल की है। वह इस बार भी जीत को जारी रखना चाहती है, लेकिन यह मुश्किल है। बीजेपी ने डॉ. अनिर्बान गांगुली को मैदान में उतारा है, जबकि टीएमसी ने अभिनेत्री और पार्टी की युवा इकाई की राष्ट्रीय अध्यक्ष सायोनी घोष को मैदान में उतारा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी दूसरे स्थान पर थी।