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Gorakhpur News: गोरखपुर नगर निगम ने बुजुर्गों के लिए शुरू की विशेष परियोजना, डे केयर सेंटर से मिलेगी नई राहत

Gorakhpur

Gorakhpur citizen welfare: गोरखपुर नगर निगम ने बुजुर्गों के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। सीनियर सिटिजन के लिए डे केयर सेंटर तैयार किया गया है, जहां उन्हें आराम, मनोरंजन और स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। इस केंद्र का उद्देश्य शहर में अकेले रहने वाले बुजुर्गों को सुरक्षित और सामाजिक माहौल प्रदान करना है। 2 करोड़ 50 लाख रुपए की लागत से यह परियोजना राज्य स्मार्ट सिटी योजना के तहत तैयार की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा इस केंद्र का लोकार्पण जल्द किया जाएगा।

बुजुर्गों के लिए नई सुविधाएं

Gorakhpur नगर निगम ने बुजुर्गों के लिए एक आधुनिक डे केयर सेंटर का निर्माण किया है। यह केंद्र बुजुर्गों को एक सुरक्षित, आरामदायक और सामाजिक माहौल प्रदान करेगा, जहां उन्हें मनोरंजन के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाएं और योग की सुविधाएं भी नि:शुल्क मिलेंगी। विशेष रूप से उन बुजुर्गों के लिए यह केंद्र मददगार होगा जो दिनभर घर में अकेले रहते हैं। इसके अलावा, यहां विधिक सलाह भी दी जाएगी, ताकि बुजुर्गों को किसी भी कानूनी मामले में मदद मिल सके।

निर्माण कार्य और उद्घाटन

इस केंद्र का निर्माण कार्य 20 दिसंबर 2023 को शुरू हुआ था और निर्धारित समय सीमा में इसे पूरा कर लिया गया है। नगर निगम ने इस केंद्र के निर्माण में आधुनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सभी पहलुओं का ध्यान रखा है। इस केंद्र के उद्घाटन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसे जल्द ही हरी झंडी देंगे। इसके साथ ही, सीनियर सिटिजन डे केयर सेंटर के परिसर में नगरीय सेवाओं के लिए एक और केंद्र तैयार किया गया है, जहां नागरिकों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, सड़क, जल, सीवर और संपत्ति से जुड़ी समस्याओं का समाधान मिलेगा।

नगरीय सेवाएं और नागरिक सुविधा

Gorakhpur सीनियर सिटिजन डे केयर सेंटर के परिसर में नगरीय सेवाओं के लिए एक आधुनिक कार्यालय भी स्थापित किया गया है। यहां नागरिकों को नगर निगम की विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, एक काउंटर भी होगा जहां नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं, खासकर सफाई से जुड़ी समस्याओं को समाधान किया जाएगा। यह केंद्र नागरिकों के लिए एक सुविधा केंद्र के रूप में काम करेगा, ताकि उन्हें नगर निगम के कामकाजी दफ्तरों में जाने की आवश्यकता न पड़े। इस परियोजना पर कुल 9 करोड़ 80 लाख 50 हजार रुपए खर्च हुए हैं।

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