गुरदासपुर के राजेश चौहान ने परिवार के साथ छुट्टियां बिताने के लिए पैसे बचाकर यात्रा की योजना बनाई थी। उन्होंने MakeMyTrip के जरिए श्रीनगर और गुलमर्ग में दो होटल बुक किए। लेकिन जब पत्नी और दो बच्चों के साथ परिवार वहां पहुंचा तो दोनों बुकिंग को लेकर बड़ी परेशानी सामने आ गई।
श्रीनगर में बुक किए गए होटल हेरिटेज रोज इन की जगह पहुंचने पर पता चला कि लिस्टेड प्रॉपर्टी वास्तव में एक निजी होमस्टे थी। अगले दिन परिवार गुलमर्ग में होटल एप्पल ट्री रिजॉर्ट्स खोजने पहुंचा, लेकिन वहां इस नाम का कोई होटल मिला ही नहीं।
कार में काटी रात
दोनों जगहों पर परेशानी के बाद परिवार के पास रात गुजारने का कोई इंतजाम नहीं बचा। उस रात तापमान करीब माइनस 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। ऐसे में राजेश को पत्नी और दोनों बच्चों के साथ कार में ही रात बितानी पड़ी।
परिवार ने गुलमर्ग के लिए पहले से गोंडोला टिकट भी बुक कर रखे थे, लेकिन होटल की समस्या के कारण उनकी यात्रा का पूरा प्लान बिगड़ गया। अगले दिन परिवार निराश होकर गुरदासपुर लौट आया।
कंपनी ने नहीं की मदद
वापस आने के बाद राजेश ने MakeMyTrip से कई बार संपर्क किया। आरोप है कि कंपनी की तरफ से न तो तत्काल मदद मिली और न ही बुकिंग की रकम वापस की गई।
कंपनी ने यह दलील दी कि वह केवल एक बिचौलिया है और होटल उसके अपने नहीं हैं। वहीं होटल की ओर से बुकिंग को ‘नो-शो’ बताया गया। राजेश ने इस मामले को पंजाब के जिला उपभोक्ता आयोग के सामने रखा।
आयोग ने जिम्मेदारी तय की
जिला उपभोक्ता आयोग ने MakeMyTrip की दलीलों को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि जब कोई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ग्राहक से पूरा भुगतान लेता है, कन्फर्म बुकिंग वाउचर जारी करता है और सत्यापित होटल उपलब्ध कराने का भरोसा देता है, तो वह अपनी जिम्मेदारी से केवल बिचौलिया होने की बात कहकर नहीं बच सकता।
आयोग के सामने यह भी पाया गया कि श्रीनगर की लिस्टेड प्रॉपर्टी होटल के बजाय होमस्टे थी, जबकि गुलमर्ग में बुक किया गया होटल अस्तित्व में ही नहीं था। ऐसे में ‘नो-शो’ का तर्क भी स्वीकार नहीं किया गया, क्योंकि जिस होटल का अस्तित्व ही नहीं था, वहां ग्राहक चेक-इन कैसे करता?
48,775 रुपये देने होंगे
आयोग ने MakeMyTrip को कुल 48,775 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। इसमें बुकिंग की 18,775 रुपये की पूरी रकम 9 फीसदी सालाना ब्याज के साथ लौटाने को कहा गया।
इसके अलावा परिवार को हुई मानसिक और शारीरिक परेशानी के लिए 25,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के तौर पर 5,000 रुपये देने का आदेश दिया गया।
बुकिंग से पहले जांचें
ऑनलाइन होटल बुक करते समय केवल बुकिंग प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने के बजाय होटल की वास्तविक लोकेशन और पहचान की जांच करना जरूरी है। Google Maps और Google Earth पर लोकेशन देखकर यह पुष्टि की जा सकती है कि प्रॉपर्टी वास्तव में मौजूद है या नहीं।
होटल की आधिकारिक वेबसाइट, फोन नंबर या सोशल मीडिया पेज से सीधे संपर्क करके भी बुकिंग की पुष्टि की जा सकती है। हाल के Google और TripAdvisor रिव्यू पढ़ना भी उपयोगी हो सकता है, खासकर पिछले एक-दो महीनों की शिकायतों पर ध्यान दें।
जहां संभव हो, रिफंडेबल बुकिंग चुनना बेहतर सुरक्षा दे सकता है। बुकिंग वाउचर मिलने के बाद होटल से फोन या WhatsApp पर पता, कमरा और चेक-इन समय दोबारा कन्फर्म करना भी जरूरी है।

